जावली में सातारा जिला बैंक का चुनाव तय, रांजणे के सामने शिंदे या गोले, 21 अक्टूबर तक फैसला
सातारा जिला बैंक की जावली सोसायटी सीट पर चुनाव अब टला हुआ नहीं माना जा रहा। ज्ञानदेव रांजणे के सामने कौन उतरेगा, यह नाम वापसी की आखिरी तारीख 21 अक्टूबर तक साफ होगा।
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सातारा जिला बैंक के चुनाव में जावली तालुका की सोसायटी निर्वाचन क्षेत्र सीट पर मुकाबला अब लगभग तय माना जा रहा है। तालुका में सोसायटी के प्रस्ताव लेने की प्रक्रिया से ही जिला बैंक चुनाव को लेकर जबरदस्त खींचतान शुरू हो गई थी और कई जगह विवाद देखने को मिला। इसी वजह से इस सीट पर चुनाव को टाला नहीं जा सकने वाला माना जा रहा है।
बैंक के मौजूदा संचालक ज्ञानदेव रांजणे के खिलाफ राष्ट्रवादी के प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे खुद मैदान में उतरेंगे या उनके समर्थक विठ्ठल गोले, इस पर अभी तक मुहर नहीं लगी है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि लगभग गोले ही उम्मीदवार रहेंगे। इसी आधार पर कहा जा रहा है कि रांजणे के लिए यह मुकाबला आसान रहेगा।
जिला बैंक चुनाव के लिए आवेदन दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और आवेदन वापस लेने की आखिरी तारीख 21 अक्टूबर है। तालुका में चर्चा चल रही है कि चुनाव होगा या उम्मीदवार निर्विरोध चुना जाएगा। इसी बीच लोगों को प्रस्ताव प्रक्रिया के दिन याद आ रहे हैं। उस दौरान अखाड़े में हुआ हंगामा आज भी तालुका के लोगों को सिहरा देता है। शशिकांत शिंदे के इस होम पिच पर ही मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने उन्हें बड़ा झटका दिया था। इन हालात को देखते हुए शिंदे के गुट की ओर से कहा जा रहा है कि प्रदेशाध्यक्ष शिंदे यहां चुनाव निर्विरोध नहीं होने देंगे। शिंदे खुद लड़ेंगे या विठ्ठल गोले, यह आवेदन वापसी तक तय होगा।
जावली के कुल 48 मतदाताओं में से 38 मतदाताओं को 10 अगस्त से सैर पर ले जाया गया है। बताया गया है कि ज्ञानदेव रांजणे ने सुरक्षा के तौर पर यह एहतियात बरता है। पिछले तीन महीने से परिवार से दूर रह रहे ये मतदाता अब तक बच्चों का चेहरा भी नहीं देख पाए हैं और उन्हें एक नवंबर तक परिवार से दूर ही रहना होगा।
पिछले पांच साल वाले चुनाव में रांजणे ने 28 मतदाताओं को सैर पर भेजा था, फिर भी वे सिर्फ एक वोट से बेहद मामूली अंतर से जीत पाए थे। इसीलिए इस बार वे तीन महीने पहले से ही अलर्ट मोड में दिखे और 38 मतदाताओं को सैर पर ले गए। चर्चा है कि अगर शशिकांत शिंदे उम्मीदवार हुए तो दो से तीन वोट इधर-उधर हो सकते हैं, लेकिन विठ्ठल गोले उम्मीदवार हुए तो रांजणे को 38 से ज्यादा वोट मिल सकते हैं।
उधर जिला स्तर पर महायुति के दस सीटों का पेंच और उलझ गया है। भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी तीनों को बराबर सीटें चाहिए। ऐसे में जावली तालुका में उम्मीदवारी की आस लगाए बैठे लोगों को टिकट मिलने की संभावना धुंधली होती जा रही है। अब देखना होगा कि आवेदन वापसी तक जावली को कोई दूसरा उम्मीदवार मिलता है या नहीं।