नागपुर में पानी के लिए भटक रहे लोग, शटडाउन खत्म होने के 72 घंटे बाद भी नल सूखे
पैच-4 जलशुद्धीकरण केंद्र के काम के लिए बंद की गई जलापूर्ति तय वक्त पर बहाल नहीं हुई, लोग परेशान हैं और मनपा के अधिकारी जवाब देने से बच रहे हैं।
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नागपुर शहर में मरम्मत और देखभाल के नाम पर बार-बार लिए जा रहे जलापूर्ति शटडाउन का सीधा असर अब लोगों की रोज की जिंदगी पर पड़ने लगा है। 6 अक्टूबर को शहर के कुछ इलाकों में 36 घंटे और कुछ इलाकों में 12 घंटे पानी बंद रखा गया था। शटडाउन की मियाद खत्म हुए पूरे 72 घंटे बीत चुके हैं, फिर भी कई इलाकों में नल सूखे पड़े हैं।
नतीजा यह है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में लोग पानी के लिए दौड़भाग कर रहे हैं। कई परिवारों को पीने के पानी का इंतजाम दूसरे तरीकों से करना पड़ रहा है। पानी सप्लाई ठीक करने के लिए आखिर क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इसकी साफ जानकारी भी लोगों को नहीं मिल रही। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस जलसंकट में मनपा प्रशासन आखिर है कहां।
पैच-4 जलशुद्धीकरण केंद्र में पाइपलाइन शिफ्ट करने के काम के लिए पानी की सप्लाई बंद की गई थी। तय किए गए 36 घंटे बीत जाने के बाद भी सप्लाई पहले जैसी नहीं हो पाई। विश्व बैंक प्रकल्प के तहत हो रहा यह काम वक्त पर पूरा नहीं हुआ, इसलिए सप्लाई बंद रखने की मियाद बढ़ानी पड़ी। इसकी वजह से प्रभावित इलाकों के लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है।
मनपा ने बताया है कि शुक्रवार से चरणबद्ध तरीके से जलापूर्ति सुचारु करने की कोशिशें शुरू की जाएंगी। महापौर नीता ठाकरे ने संबंधित अधिकारियों को काम तेज करने और जल्द से जल्द सप्लाई पहले जैसी करने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को देर शाम उपमहापौर लीला हाथीबेड ने मौके पर जाकर चल रहे काम का जायजा लिया।
शहर की जलवितरण व्यवस्था एक निजी कंपनी को सौंपे जाने के बाद मनपा के जलापूर्ति विभाग की भूमिका क्या है, यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है। सप्लाई में रुकावट आने पर लोगों को वजह और पानी कब शुरू होगा, यह बताया जाना चाहिए। लेकिन संबंधित अधिकारियों की तरफ से तसल्लीबख्श जानकारी नहीं दी जा रही।
लोगों का कहना है कि किसी अधिकारी से पूछो तो वह कहता है कि अधिकार दूसरी वरिष्ठ महिला अधिकारी के पास हैं। उनके पास जाओ तो कार्यकारी अभियंता के पास भेज दिया जाता है। इससे साफ दिखता है कि एक ही विभाग के अधिकारियों के बीच तालमेल नहीं है।
आचारसंहिता का हवाला भी दिया जा रहा है, जबकि इसके चलते शहर के बेहद जरूरी कामों पर कोई रोक नहीं होती। तो हजारों लोगों को पीने का पानी मुहैया कराने से बड़ा जरूरी काम और क्या होगा, यह सवाल उठाया जा रहा है। मनपा प्रशासन को पदाधिकारियों के निर्देश का इंतजार करने के बजाय आपातकालीन हालात में खुद फैसला लेना चाहिए।
लोगों की शिकायत यह भी है कि शहर में अचानक पैदा होने वाली दिक्कतों पर भी अधिकारी खुद आगे आकर पहल नहीं करते। गुरुवार को कई इलाकों के लोगों को पानी के लिए सचमुच भगवान भरोसे रहना पड़ा।