सातारा जिला बैंक में निर्विरोध चुने गए उदयनराजे बोले, पद नहीं, लोगों की सेवा मकसद
सांसद उदयनराजे भोसले ने जिला बैंक के संचालक चुने जाने के बाद हुए सत्कार समारोह में कहा कि पद से बड़ी चीज जनता से जुड़ाव है।
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सातारा जिला बैंक के संचालक पद पर निर्विरोध चुने जाने के बाद सांसद उदयनराजे भोसले ने अपने भाषण में कहा कि सत्ता और पदों से ज्यादा अहम जनता के प्रति जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, "मैं पद के लिए बेचैन नहीं हूं। मैंने सांसद पद से इस्तीफा भी दिया था। उसके मुकाबले जिला बैंक का पद बड़ा नहीं है। इसके जरिए आम लोगों की सेवा की जा सकती है, यही मेरी भूमिका है।"
उदयनराजे भोसले मित्र मंडल की ओर से होटल लेक व्यू में उनके सत्कार का कार्यक्रम रखा गया था। इसमें पूर्व जिला परिषद सभापति सुनील काटकर, काका धुमाल, संग्राम बर्गे, डी. के. पवार, रामभाऊ लाहोटी, संतोष कणसे, बाळासाहेब ननावरे, अशोक मोने, यशवंत ढाणे, उदयसिंह जगदाळे और धनाजी साळुंखे समेत कई लोग मौजूद थे।
इस मौके पर उदयनराजे ने अपने घराने की परंपरा, सहकारिता आंदोलन के असली मकसद और आम लोगों के विकास को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिला बैंक हो या कोई और क्षेत्र, घराने की परंपरा को वे कभी कमजोर नहीं पड़ने देंगे और किसी भी मुश्किल वक्त में पीछे नहीं हटेंगे। उनके मुताबिक पद आते हैं और जाते हैं, वे उसकी फिक्र नहीं करते। उन्होंने भावुक होकर कहा कि बड़ों का आशीर्वाद ही उनका पुण्य है।
सहकारिता के बारे में उदयनराजे ने कहा कि सहकारी बैंक, सहकारी साख संस्थाएं, सूत कताई मिलें और चीनी मिलें इस आंदोलन के मुख्य साधन हैं। उनका फायदा किसानों, मेहनतकशों, उपेक्षित तबकों और आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सहकारिता का उपयोग इन लोगों की आने वाली पीढ़ियों की तरक्की के लिए भी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सहकारिता आंदोलन बड़े पैमाने पर जड़ें जमा चुका है और सातारा जिला बैंक की अगुआई कई दिग्गजों ने की है। उनके अनुसार आम आदमी को केंद्र में रखा गया, इसीलिए सहकारिता नीचे तक पहुंच पाई। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सहकारिता में राजनीति घुस गई तो आम लोगों की तरक्की का असली मकसद पीछे छूट जाता है और आंदोलन की दुर्दशा हो जाती है।
जिला बैंक में आने की वजह बताते हुए उदयनराजे ने कहा, "मुझसे ज्यादा सहकारिता की जानकारी रखने वाले कई लोग हैं। लेकिन उनका आग्रह था कि मैं जिला बैंक में रहूं। ज्यादा से ज्यादा लोगों की सेवा का मौका मिलता है, बस इतना ही जिला बैंक में आने के पीछे का मकसद है।"