सूखे और कर्ज के बीच मराठवाड़ा-विदर्भ में 12 किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए
मराठवाड़ा के 8 और विदर्भ के 4 किसानों की आत्महत्या की जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार ने 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया है।
महाराष्ट्र में सूखे और फसल के नुकसान के बीच मराठवाड़ा और विदर्भ से 12 किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक इनमें मराठवाड़ा के 8 और विदर्भ के 4 किसान हैं। कीटनाशक पीने और फांसी से जान जाने की बात कही गई है।
पिछले कुछ समय से बारिश कम हुई है, जिससे कई इलाकों में खेत में खड़ी फसल पर असर पड़ा है। खासकर सोयाबीन समेत खरीफ की फसलों को नुकसान हुआ है और किसानों पर आर्थिक संकट गहरा गया है। फसल के नुकसान के साथ कर्ज का दबाव भी उनकी मुश्किल बढ़ा रहा है।
राज्य सरकार ने 26 सितंबर को 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया। यह राज्य की करीब तीन-चौथाई तहसीलों के बराबर है। सरकार ने बारिश की कमी और दूसरे सूचकांकों को आधार बनाया है। विदर्भ की 95 तहसीलें सूखा प्रभावित सूची में हैं, जबकि मराठवाड़ा में भी बड़ी संख्या में तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।
मराठवाड़ा में नांदेड, हिंगोली, छत्रपति संभाजीनगर और लातूर जैसे जिलों से मामले आए हैं। नांदेड जिले में भोकर तहसील के नांदा खुर्द के प्रकाश राठोड और लोहा तहसील के आंबेसांगवी के घनश्याम कदम की इलाज के दौरान मौत हुई। हिंगोली जिले की औंढा तहसील के ब्राह्मणवाडा के तानाजी मोरे की भी इलाज के दौरान मौत हो गई।
छत्रपति संभाजीनगर जिले के मुरूमखेड़ा के विजय बचाटे और कन्नड़ तहसील के रामपुरा तांडा के दिगंबर राठोड की मौत का मामला भी सामने आया है। लातूर जिले में अहमदपुर तहसील के देशकरा के तुकाराम मुजे और शिरूर अनंतपाल तहसील के सकोल के मुडाग्या कुंभार की मौत की जानकारी दी गई है।
विदर्भ में यवतमाल, बुलढाणा, अकोला और वाशिम जिलों से चार मामले आए हैं। इनमें यवतमाल जिले के रालेगांव के सदाशिव कोहले, बुलढाणा तहसील के रुईखेड़ मायंबा के पंजाबराव रामेकर, अकोला जिले के गाजीपुर के सतीश पातोंड और वाशिम जिले की मालेगांव तहसील के अमानी के नीलकंठ सराफ शामिल हैं।
सूखा घोषित होने के बाद प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का आकलन और राहत की प्रक्रिया शुरू हुई है। सरकार ने फसल ऋण का पुनर्गठन, कृषि ऋण की वसूली में राहत और कृषि पंपों के बिजली बिल में रियायत जैसे उपायों की घोषणा की है। नुकसान का पंचनामा कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचे और साथ ही पानी, चारा और आने वाले रबी सीजन के लिए जरूरी मदद भी उपलब्ध कराई जाए।