उल्हासनगर के विवाद पर शिवसेना और भाजपा आमने-सामने, लांडगे के बयान पर भाजपा नेताओं का पलटवार
उल्हासनगर में स्वीकृत पार्षदों के चयन से शुरू हुआ शिवसेना शिंदे गुट और भाजपा का विवाद अब कल्याण-डोंबिवली पहुंच गया है।
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उल्हासनगर में स्वीकृत पार्षदों के चयन को लेकर शिवसेना शिंदे गुट और भाजपा के बीच शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब कल्याण-डोंबिवली तक पहुंच गया है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण को लेकर शिवसेना पदाधिकारी कमलेश निकम ने जो विवादित बयान दिया था, उसका समर्थन शिवसेना शिंदे गुट के जिला प्रमुख गोपाल लांडगे ने किया है। इसके बाद दोनों पार्टियों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है और भाजपा नेताओं ने लांडगे को जवाब दिया है।
उल्हासनगर में स्वीकृत पार्षदों के चयन को लेकर चल रहे विवाद के दौरान कमलेश निकम ने रवींद्र चव्हाण के बारे में बयान दिया था। लांडगे ने इस बयान का समर्थन करते हुए दावा किया कि निकम ने जो कहा वह सच है। लांडगे ने यह भी बताया कि निकम के पास अपने बयान के सबूत हैं। इसी वजह से उल्हासनगर का यह विवाद कल्याण-डोंबिवली में भी चर्चा का विषय बन गया है।
भाजपा पर टिप्पणी करते हुए लांडगे ने सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के कामों का भी जिक्र किया। लांडगे का दावा है कि जो काम भाजपा के मंत्री और विधायक नहीं कर पाए, वे काम सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने करके दिखाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उल्हासनगर में स्वीकृत पार्षदों की चयन प्रक्रिया में भाजपा के उम्मीदवार अपात्र ठहरे और भाजपा पात्र उम्मीदवार भी नहीं दे सकी, लेकिन इस नाकामी का ठीकरा शिवसेना पर फोड़ा जा रहा है।
लांडगे के बयान के बाद कल्याण-डोंबिवली के भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। केडीएमसी के सदन नेता वरुण पाटील ने शिवसेना पदाधिकारियों की आलोचना की। उन्होंने कहा, "हमारे नेताओं पर बोलने की शिवसेना पदाधिकारियों की लायकी नहीं है।" भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष को लेकर दिए जा रहे बयानों पर भाजपा नेताओं ने नाराजगी जताई है।
केडीएमसी में भाजपा के गुट नेता शशिकांत कांबळे ने भी लांडगे की भूमिका पर नाराजगी जाहिर की। कांबळे के मुताबिक गोपाल लांडगे शिवसेना के जिला प्रमुख हैं और उनसे ऐसे छोटे विवाद में पड़ने की उम्मीद नहीं थी। कांबळे ने कहा, "इन चिल्लर बातों पर गोपाल लांडगे बोलेंगे, ऐसी हमें उम्मीद नहीं थी।" उन्होंने यह भी कहा कि रवींद्र चव्हाण की राजनीतिक ऊंचाई क्या है, यह पूरी दुनिया जानती है।
इस तरह उल्हासनगर में स्वीकृत पार्षदों के चयन से शुरू हुआ स्थानीय विवाद अब कल्याण-डोंबिवली में दोनों पार्टियों के नेताओं तक पहुंच गया है। एक तरफ गोपाल लांडगे ने कमलेश निकम के बयान का समर्थन किया है, दूसरी तरफ भाजपा के वरुण पाटील और शशिकांत कांबळे ने लांडगे को जवाब दिया है। इस जुबानी जंग से स्थानीय स्तर पर शिवसेना शिंदे गुट और भाजपा के बीच मतभेद फिर सामने आ गए हैं।
उल्हासनगर और कल्याण-डोंबिवली की इन राजनीतिक गतिविधियों के बीच दोनों पार्टियों के स्थानीय पदाधिकारियों में आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। अब राजनीतिक गलियारों की नजर इस पर है कि इस विवाद में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे क्या रुख अपनाते हैं।