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16:10 IST

सुले के दामाद की कंपनी को 1,200 एकड़ जमीन लीज पर, दमानिया ने उठाए सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने अहिल्यानगर के हारेगांव की 1,200 एकड़ जमीन 49 साल की लीज पर देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

सुले के दामाद की कंपनी को 1,200 एकड़ जमीन लीज पर, दमानिया ने उठाए सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने महाराष्ट्र सरकार के एक जमीन आवंटन पर सवाल खड़े किए हैं। दमानिया के मुताबिक, सरकार ने अहिल्यानगर जिले के हारेगांव गांव की 1,200 एकड़ उपजाऊ जमीन मुंबई की कंपनी विश्वराज रिन्युएबल्स प्रायवेट लिमिटेड को लीज पर दी है। उनका कहना है कि यह कंपनी सारंग लखानी की है।

दमानिया ने बताया कि सारंग लखानी राष्ट्रवादी कांग्रेस (सपा) की सांसद सुप्रिया सुले के दामाद हैं और भाजपा के विधान परिषद सदस्य अरुण लखानी के बेटे हैं। उनके मुताबिक लखानी को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी माना जाता है। 5 अक्टूबर को जारी आदेश के तहत महाराष्ट्र राज्य कृषि महामंडल की यह जमीन कंपनी को 49 साल के लिए लीज पर दी गई है।

दमानिया ने यह भी कहा कि निबे ग्रुप नाम की एक और निजी कंपनी को 1,500 एकड़ जमीन लीज पर देने का आदेश जारी होने के सिर्फ दो हफ्ते बाद यह आवंटन हुआ। इसके अलावा सरकार ने रक्षा से जुड़ी परियोजनाओं के लिए डीआरडीओ को भी 1,500 एकड़ जमीन दी है।

दमानिया ने सबसे पहले टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि इतने बड़े जमीन सौदे के लिए टेंडर क्यों नहीं निकाला गया और क्या प्रतिस्पर्धी बोली से सरकार को ज्यादा लीज रकम मिल सकती थी। उन्होंने आवंटन की प्रक्रिया और लीज की शर्तों को लेकर चिंता भी जताई।

उन्होंने बताया कि जून में सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत महाउर्जा के जरिए इसी जमीन पर ग्रीन एनर्जी पार्क बनाने का फैसला किया था। लेकिन सिर्फ तीन महीने बाद, सितंबर में, वही 1,200 एकड़ जमीन सीधे एक निजी कंपनी को दे दी गई। दमानिया ने पूछा कि नीति में यह बदलाव किसके निर्देश पर हुआ। उनके मुताबिक सरकारी आदेश में इसकी कोई वजह नहीं दी गई है।

दमानिया ने 48 साल की लीज की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया, जो और 48 साल के लिए बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने पूछा कि यह जमीन शुरू में पांच साल के ट्रायल पीरियड के लिए लीज पर क्यों नहीं दी गई। उन्होंने यह भी पूछा कि सिक्योरिटी डिपॉजिट क्यों माफ किया गया। दमानिया ने आरोप लगाया कि कुछ कारोबारी राजनीति में आते हैं और पैसा कमाने के लिए राजनीतिक सत्ता का इस्तेमाल करते हैं।

आदेश के मुताबिक विश्वराज रिन्युएबल्स को सरकारी मंजूरी के अधीन अपनी सहायक कंपनी या किसी दूसरी ग्रुप कंपनी को जमीन लीज पर देने की इजाजत दी गई है। इस काम के लिए कंपनी को महाराष्ट्र राज्य कृषि महामंडल से एनओसी लेने से भी छूट मिली है। आदेश में 23 जून को हुई बैठक का जिक्र है, जिसमें राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, उद्योग मंत्री उदय सामंत और पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे मौजूद थे।

इस आवंटन से हारेगांव का पुराना जमीन विवाद फिर गरम हो गया है। ब्रिटिश राज में स्थानीय किसानों से करीब 7,376 एकड़ जमीन ली गई थी। मूल मालिक और उनके परिवार अपनी जमीन वापस मांग रहे हैं। 15 सितंबर को राज्य सरकार ने मूल किसानों को जमीन लौटाने का फैसला किया था। फिर भी महामंडल के नियंत्रण वाली कुछ जमीन अब रक्षा और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए लीज पर दी जा रही है।

इस बीच, 23 अगस्त को सरकार ने निबे ग्रुप को 1,500 एकड़ और डीआरडीओ को 1,500 एकड़ जमीन लीज पर देने का आदेश जारी किया था। 5 अक्टूबर के आदेश में विश्वराज रिन्युएबल्स को 1,200 एकड़ अतिरिक्त जमीन लीज पर देने का प्रावधान है। इन आवंटनों से अपनाई गई प्रक्रिया, लीज की शर्तों और जमीन जोतने वाले मूल परिवारों के दावों पर सवाल खड़े हुए हैं।

विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि उनके दामाद का कारोबार और व्यावसायिक गतिविधियां पूरी तरह उनका निजी मामला हैं। उन्होंने कहा, "मेरा दामाद कौन सा कारोबार या काम करता है, यह पूरी तरह उसका निजी मामला है। मैं इस पर टिप्पणी कैसे कर सकती हूं?"

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