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20:39 IST

मुंबई में बच्चों की पढ़ने की आदत पर चर्चा, अमिश त्रिपाठी बोले- किताबें सबसे अच्छा निवेश

मुंबई में बच्चों में पढ़ने की आदत डालने पर हुई चर्चा में लेखक अमिश त्रिपाठी, डॉ. स्वाति पोपट वत्स और क्रांति गाडा ने पालकों को सलाह दी।

मुंबई में बच्चों की पढ़ने की आदत पर चर्चा, अमिश त्रिपाठी बोले- किताबें सबसे अच्छा निवेश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

आज के डिजिटल दौर में बच्चों का काफी वक्त मोबाइल, स्क्रीन और AI के साथ गुजरता है। ऐसे में उनमें पढ़ने का शौक पैदा करना जरूरी है। इसी सोच से बच्चों की किताबें किराये पर देने वाले भारत के पहले ऐप आधारित प्लेटफॉर्म neOwn ने मुंबई में एक खास चर्चा सत्र रखा।

इस कार्यक्रम में मशहूर लेखक अमिश त्रिपाठी, पोदार एजुकेशन नेटवर्क की अध्यक्ष डॉ. स्वाति पोपट वत्स और neOwn की संस्थापक क्रांति गाडा शामिल हुईं। फिनलैंड इंटरनेशनल स्कूल, महालक्ष्मी, मुंबई कार्यक्रम का स्थल भागीदार था। वरिष्ठ पत्रकार कल्पना रवी ने चर्चा का संचालन किया।

चर्चा का विषय था "आपके बच्चों की पढ़ने की आदत - भविष्य के लिए एक अहम निवेश"। इसमें बताया गया कि पढ़ने से सिर्फ स्कूल की पढ़ाई में मदद नहीं मिलती, बल्कि बच्चों की सोचने की क्षमता, कल्पनाशक्ति, बात करने का हुनर और दूसरों को समझने की आदत भी बढ़ती है। मोबाइल और AI से जानकारी आसानी से मिल जाती है, फिर भी किताबों से बच्चे किसी विषय पर गहराई से सोच पाते हैं और अपनी राय बना पाते हैं।

नियमित पढ़ने से बच्चों का शब्दज्ञान बढ़ता है, उनकी भाषा सुधरती है और लिखने-बोलने का आत्मविश्वास भी बढ़ता है। ये बदलाव एक दिन में नहीं आते। पढ़ने की आदत लगातार बनाए रखने से धीरे-धीरे दिखते हैं। इसलिए बच्चों के भविष्य के लिए पढ़ना एक अहम निवेश है, यह राय वहां रखी गई।

क्रांति गाडा ने कहा, "पढ़ने से बच्चों को सिर्फ ज्ञान नहीं मिलता, उनकी कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता, शब्द भंडार और आत्मविश्वास भी बढ़ता है। साथ ही दूसरों के विचार समझने और अलग-अलग नजरिये से चीजें देखने की आदत पड़ती है। बड़े होते वक्त सही फैसले लेने और मुश्किलों से पार पाने में यह सब काम आता है। इसलिए पालकों के लिए बच्चों में पढ़ने की आदत डालना जरूरी है। इसकी शुरुआत पालकों को खुद पढ़कर करनी चाहिए।"

लेखक अमिश त्रिपाठी ने कहा, "बच्चों के भविष्य के लिए पढ़ना सबसे अच्छा निवेश है। कहानियों और किताबों से बच्चे सीख सकते हैं कि नाकामी का सामना कैसे करें, हिम्मत कैसे दिखाएं और मुश्किल आने पर फिर से कैसे खड़े हों। किताबों की अहमियत सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है। पढ़ने से बच्चों के सोचने का तरीका बनता है और जिंदगी की चुनौतियों का सामना करने की ताकत मिलती है।"

पोदार एजुकेशन नेटवर्क की अध्यक्ष डॉ. स्वाति पोपट वत्स ने कहा, "बच्चों में पढ़ने की आदत डालना सिर्फ बच्चों की जिम्मेदारी नहीं है, पालकों की भी उतनी ही अहम जिम्मेदारी है। बच्चों को किताबों, विचारों और नई चीजों की दुनिया दिखाना जरूरी है। पढ़ने से सिर्फ भाषा और अक्षर की पहचान नहीं बनती, इसका संबंध बच्चों के दिमाग के विकास, संस्कार और पालन-पोषण से भी है। पढ़ने से पालक अपने बच्चों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।"

क्रांति गाडा ने 2023 में neOwn की स्थापना की थी। मुंबई से शुरू हुए इस प्लेटफॉर्म का नेटवर्क देश भर में 25 हजार से ज्यादा परिवारों तक पहुंचा है और 15 हजार से ज्यादा सक्रिय सदस्य हैं। प्लेटफॉर्म पर 75 हजार से ज्यादा किताबें हैं, जिनमें Scholastic, HarperCollins, Penguin और Hachette जैसे प्रकाशकों की किताबें शामिल हैं। 0 से 14 साल के बच्चों के लिए रहस्य कथाएं, फैंटेसी कहानियां, कॉमिक्स और जानकारी वाली किताबें यहां मिलती हैं। भारतीय लेखकों की किताबों पर भी खास जोर दिया जाता है।

इस चर्चा सत्र से बच्चों में पढ़ने की आदत डालने का अहम संदेश दिया गया। पढ़ने से बच्चे बेहतर सोच पाते हैं, उनकी कल्पनाशक्ति बढ़ती है और वे अपने विचार असरदार ढंग से रख पाते हैं। बदलते वक्त में बच्चों को सक्षम बनाने के लिए किताबों से दोस्ती करना जरूरी है।

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