यूपी राज्यसभा: भाजपा के 8 उम्मीदवारों में स्मृति ईरानी, हरदीप पुरी का नाम नहीं
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा ने 8 नाम घोषित किए हैं। स्मृति ईरानी, हरदीप पुरी, हरिश द्विवेदी और बी. एल. वर्मा इस सूची में नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए भाजपा ने अपने 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। पिछले कुछ दिनों से जिन बड़े नामों की चर्चा चल रही थी, उनमें से कई इस सूची में नहीं हैं। इससे राजनीतिक गलियारों में बातें तेज हो गई हैं। चर्चा यह भी है कि आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने उम्मीदवार चुनते वक्त स्थानीय समीकरणों के साथ जातीय गणित का भी ध्यान रखा है।
भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर कुछ दिनों से कई अटकलें चल रही थीं। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, हरिश द्विवेदी और बी. एल. वर्मा के नाम आगे बताए जा रहे थे। लेकिन पार्टी ने जो आठ नाम जारी किए हैं, उनमें इनमें से किसी का नाम नहीं है।
इसके अलावा पूर्व सांसद कौशल किशोर और संजीव बालियान को भी राज्यसभा का मौका मिलने की चर्चा थी। पार्टी की आखिरी सूची में उनके नाम भी नहीं हैं। अब नजर इस पर है कि भाजपा इससे क्या राजनीतिक संदेश देना चाहती है।
कहा जाता है कि भाजपा में पार्टी के महासचिवों को कुछ समय बाद राज्यसभा भेजने की परंपरा रही है। पिछले कुछ सालों में पार्टी के लिए लंबे समय तक काम करने वाले नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी के बाद ऊपरी सदन में जगह दी गई है।
स्मृति ईरानी के मामले में अलग फैसला होने की चर्चा है। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पार्टी ने इस बार लोकसभा चुनाव हारे नेताओं को राज्यसभा का टिकट न देने का फैसला किया है। स्मृति ईरानी 2024 का लोकसभा चुनाव हार गई थीं। इसलिए कहा जा रहा है कि उनका नाम आखिरी सूची में न होने की एक अहम वजह यह हो सकती है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और बी. एल. वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल अगले महीने खत्म हो रहा है। दोनों को इस बार दोबारा राज्यसभा का मौका नहीं मिला है। इसलिए उनके केंद्रीय मंत्री पद को लेकर भी अब राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
भाजपा सूत्रों के हवाले से किए जा रहे दावे के मुताबिक पार्टी में कुछ स्तरों पर हरदीप पुरी के काम करने के तरीके को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। खास तौर पर ईरान संकट के दौरान उनकी भूमिका से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संतुष्ट न होने की बात चल रही है। हालांकि इस बारे में भाजपा की तरफ से कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है।
पुरी को पहले दो बार राज्यसभा भेजा जा चुका है। उन्होंने लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अब नवंबर में उनका राज्यसभा कार्यकाल खत्म होगा। उसके बाद नियम के मुताबिक वे कुछ और समय केंद्रीय मंत्री बने रह सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषण यह है कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने उम्मीदवार चुनते वक्त स्थानीय नेतृत्व, सामाजिक समीकरण और जातीय गणित में संतुलन बिठाने की कोशिश की है। चर्चा है कि बड़े नामों को किनारे रखकर नए चेहरों को मौका देने के पीछे पार्टी की व्यापक चुनावी रणनीति है।
अब बाकी दो सीटों के लिए भाजपा की तरफ से कौन से नाम सामने आते हैं और इस फैसले का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है, यह देखना अहम होगा।