कर्जत पावर प्रोजेक्ट: मंत्री गणेश नाईक बोले, ज्यादा से ज्यादा पेड़ बचाने के तरीके देख रहे हैं
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रायगढ़ जिले के कर्जत में प्रस्तावित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए 32,000 से ज्यादा पेड़ काटने के विरोध के बीच वन मंत्री गणेश नाईक ने रविवार को कहा कि वे पेड़ बचाने और नए पौधे लगाने के रास्ते देख रहे हैं।
रायगढ़ जिले में प्रस्तावित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए 32,000 से ज्यादा पेड़ काटने का विरोध बढ़ता जा रहा है। इसी बीच महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाईक ने रविवार को कहा कि वे देख रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ कैसे बचाए जा सकते हैं और उनकी भरपाई के लिए पौधे कैसे लगाए जा सकते हैं।
पत्रकारों से बात करते हुए नाईक ने साफ किया कि कर्जत में भीमाशंकर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के पास टोरेंट पावर के 3,000 मेगावाट के सैदोंगर-I पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट को मंजूरी उनके वन विभाग संभालने से पहले ही मिल चुकी थी। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे प्रोजेक्ट की जानकारी की समीक्षा कर रहे हैं।
नाईक ने कहा, "मैं देख रहा हूं कि साइट पर ज्यादा से ज्यादा पेड़ कैसे बचाए जा सकते हैं और उनकी जगह और पेड़ कैसे लगाए जा सकते हैं।"
टोरेंट पावर यह प्रोजेक्ट करीब 13,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बना रही है। 32,000 से ज्यादा पेड़ काटने और जंगल की जमीन के डायवर्जन को लेकर इस पर विरोध शुरू हो गया है। प्रोजेक्ट के पर्यावरण पर असर को लेकर बहस तेज हो रही है, जबकि राज्य सरकार इसका बचाव करते हुए इसे साफ ऊर्जा बनाने और बिजली स्टोर करने के लिए जरूरी बता रही है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रोजेक्ट का समर्थन किया है। उनका कहना है कि पंप्ड स्टोरेज से सौर और पवन ऊर्जा के उतार-चढ़ाव को संतुलित करने और बिजली की पीक मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। उन्होंने विरोध को राजनीति से प्रेरित बताया, साथ ही कहा कि सरकार असली चिंताओं को सुनने और बेहतर विकल्पों पर विचार करने को तैयार है।
ऊर्जा राज्य मंत्री मेघना बोर्डीकर ने भी प्रोजेक्ट का बचाव किया। उनके मुताबिक केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय की तय की हुई शर्तों का पालन करने के बाद ही इसे मंजूरी मिली। टोरेंट पावर का कहना है कि प्रोजेक्ट भीमाशंकर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी और उसके इको-सेंसिटिव जोन के बाहर है।
दूसरी तरफ विपक्ष के नेताओं ने पेड़ कटाई, जंगल की जमीन के डायवर्जन, जैव विविधता और स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी पर असर को लेकर चिंता जताई है। इनमें शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और NCP (SP) के विधायक रोहित पवार शामिल हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने भी प्रोजेक्ट वाले इलाके का दौरा कर वहां के लोगों से मुलाकात की।
NatConnect Foundation और Vanashakti जैसे पर्यावरण संगठनों ने जंगल के नुकसान, वन्यजीवों के ठिकानों, पानी की सुरक्षा और पश्चिमी घाट पर प्रोजेक्ट के पारिस्थितिक असर को लेकर चिंता जताई है।
सैदोंगर, पाली और दूसरे प्रभावित इलाकों के गांव वाले भी विरोध कर रहे हैं। उन्हें डर है कि जंगल पर टिकी रोजी-रोटी और चराई की जमीन छिन जाएगी, और विस्थापन भी हो सकता है।
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