महाराष्ट्र में इंसान और जंगली जानवरों के टकराव पर लगाम के लिए हर वन विभाग में खास टीमें
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राज्य सरकार ने जंगली जानवरों के हमले रोकने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमें तैनात करने को मंजूरी दी है।
महाराष्ट्र में इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं। इन्हें रोकने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पूरे राज्य में खास रैपिड रिस्पॉन्स टीमें (Rapid Response Teams) तैनात करने को सरकार ने मंजूरी दे दी है। राज्य वन्यजीव मंडल ने इस प्रस्ताव को मान्यता दी है।
इन टीमों का मुख्य मकसद है कि जंगली जानवर इंसानी बस्तियों में न घुसें और लोगों व पालतू जानवरों पर होने वाले हमले कम हों। टीमों के पास जानवरों को बेहोश करने के लिए ट्रैंक्विलाइज़र गन और उन्हें पकड़ने के लिए खास जाल-पिंजरे होंगे। बस्ती में आए तेंदुए, बाघ या किसी और जंगली जानवर को सुरक्षित पकड़कर वापस जंगल में छोड़ने की जिम्मेदारी इन्हीं टीमों की होगी। इसके लिए टीम में पशु चिकित्सा अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा।
वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एम. श्रीनिवास राव द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, हर वन विभाग में ये टीमें तैनात होंगी। इससे जानवर बस्ती में घुसे तो फौरन कार्रवाई हो सकेगी।
मुंबई, जुन्नर और चंद्रपुर में ज्यादा घटनाएं: मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR), पुणे जिले का जुन्नर तालुका और चंद्रपुर को इस टकराव के मुख्य केंद्र माना गया है। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से निकलने वाले तेंदुए मुंबई, ठाणे और मीरा-भाईंदर के रिहायशी इलाकों में बार-बार दिखते हैं। जुन्नर में गन्ने के खेतों के पास तेंदुओं के हमले हुए हैं। चंद्रपुर में बाघों की हलचल और हमलों से लोगों में चिंता बढ़ी है।
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2020-21 से 2025-26 के बीच इस टकराव में 501 लोगों की मौत हुई और 4 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए। इसी दौरान राज्य भर में 30 हजार से ज्यादा पालतू जानवर मारे गए।
पर्यावरण संगठनों का एतराज: पर्यावरण संगठनों ने इस फैसले के असर पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और खनन से जंगल घट रहे हैं, इसलिए जानवरों को इंसानी बस्तियों की तरफ आना पड़ता है। चंद्रपुर के पर्यावरणवादी सुरेश चोपणे ने बताया कि बाघ और तेंदुओं की बस्तियों की तरफ हलचल पहचानने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल शुरू है। लेकिन उन्होंने जोर दिया कि हमले का इंतजार किए बिना पहले से रोकथाम के उपाय जरूरी हैं।
वनशक्ति के संस्थापक डी. स्टालिन ने जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास से हटाने के नजरिए की आलोचना की। उनका आरोप है कि वन संरक्षण के बजाय जानवरों को दूसरी जगह भेजने को तरजीह दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास प्रोजेक्टों का जंगलों पर असर और प्राकृतिक आवास की बर्बादी, यानी टकराव की असल वजहें, नजरअंदाज हो रही हैं।
वन विभाग के 320 पदों का प्रस्ताव: वन विभाग ने 320 पद बनाने का प्रस्ताव रखा था। राज्य के वित्त विभाग ने इसमें कुछ बदलाव सुझाए हैं। शुरू में इसमें 272 नियमित और 48 ठेके वाले पद थे। अब सभी 320 पद ठेके पर भरने की सिफारिश की गई है। इसके लिए खर्च की मंजूरी मिलना जरूरी है।
महाराष्ट्र वन्यजीव विकास प्रतिष्ठान बनेगा: राज्य वन्यजीव मंडल ने महाराष्ट्र वन्यजीव विकास प्रतिष्ठान बनाने को भी मंजूरी दी है। इस संस्था के जरिए उन संरक्षित वन क्षेत्रों को फंड दिया जा सकेगा, जिनके लिए अलग से आर्थिक प्रावधान नहीं है। साथ ही राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों में संरक्षण के कामों के लिए एकजुट आर्थिक व्यवस्था खड़ी करने की योजना है।
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