कर्जत में पेड़ काटने आएं तो थाली-कटोरी बजाकर भगाओ, सयाजी शिंदे की अपील
अभिनेता और पर्यावरण कार्यकर्ता सयाजी शिंदे ने रायगड के कर्जत में गुजरात की टोरेंट कंपनी के प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए हो रही पेड़ कटाई का विरोध किया।
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मुंबई में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिनेता और पर्यावरण कार्यकर्ता सयाजी शिंदे ने रायगड के कर्जत में हो रही पेड़ कटाई के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि गुजरात की टोरेंट कंपनी के प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए अब एक भी पेड़ नहीं कटने दिया जाएगा।
शिंदे ने लोगों से अपील की कि अगर कोई पेड़ काटने आए तो उसे कोरोना से भी खतरनाक बीमारी समझें। उनका कहना था कि हाथ में थाली और कटोरियां लेकर बजाते हुए ऐसे लोगों को वहां से भगा दें।
रायगड के कर्जत में भीमाशंकर अभयारण्य के बगल में टोरेंट कंपनी का एक ऊर्जा प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इसके लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं और अब तक हजारों पेड़ कट चुके हैं। इसी वजह से पर्यावरण कार्यकर्ता एकजुट हुए हैं और उन्होंने आक्रामक रुख अपना लिया है।
शिंदे ने कहा कि सह्याद्री दुनिया के बड़े आश्चर्यों में से एक है। उनके मुताबिक जानवरों और पंछियों के घर पर बम गिराकर, उन्हें उजाड़कर हम आखिर क्या हासिल कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि टोरेंट के प्रोजेक्ट के लिए अब कर्जत-भीमाशंकर में एक भी पेड़ नहीं कटने देंगे।
उन्होंने कहा, "विकास के नाम पर जमीनें ली गईं तो वहां की आने वाली पीढ़ियां भीख मांगने की हालत में पहुंच जाएंगी। अब एक भी पेड़ मत कटने दो, वरना मान लो कि विकास खत्म हो गया। एक भी पेड़ काटे बिना यह प्रोजेक्ट करना हो तो करें, हमारा उससे विरोध नहीं है। दुनिया में सिर्फ 18 प्रतिशत जंगल बचे हैं। उन्हें 33 प्रतिशत करना जरूरी है। लेकिन उन्हें बढ़ाने की जगह ये पेड़ काटे जा रहे हैं।"
शिंदे ने शेकरू का जिक्र किया, जो राज्य का प्राणी है और भीमाशंकर अभयारण्य में रहता है। उन्होंने पूछा कि उसे यह सीमा कैसे समझ आएगी कि उसे सिर्फ अभयारण्य में रहना है और बगल के कर्जत में नहीं जाना है। उन्होंने यह भी पूछा कि सौ-डेढ़ सौ साल पुराने पेड़ काटकर हम क्या कर रहे हैं।
उनका कहना था कि अब टोरेंट जैसा एक भी प्रोजेक्ट उन्हें नहीं चाहिए। इसके लिए कोई भी पेड़ नहीं कटना चाहिए। जो पुराना पर्यावरणीय ढांचा है, उसे छुए बिना ये प्रोजेक्ट किए जाएं। उन्होंने सवाल किया, "पर्यावरण नष्ट करने के लिए आपको चुना गया है क्या?" शिंदे ने कहा कि जो बड़े पेड़ मौजूद हैं, उन्हें न काटा जाए, यही उनकी मांग है।
शिंदे ने बताया कि वे सेव सह्याद्री नाम का एक संगठन बना रहे हैं, जिसमें एक लाख बच्चों को जोड़ा जा रहा है। उनके मुताबिक इसी के जरिए सह्याद्री में पर्यावरण को बिगाड़ने वाले ऐसे प्रोजेक्टों का विरोध किया जाएगा।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि नाशिक में हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं और शक्तिपीठ के लिए भी पेड़ कट रहे हैं। पालघर के एमआईडीसी प्रोजेक्ट के लिए पांच लाख पेड़ काटे जाने हैं, जबकि शिरोड में 70 हजार पेड़ कटेंगे। राज्य में ऐसे कई प्रोजेक्ट हैं, जिनके लिए कुल 10 लाख पेड़ काटे जाएंगे।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह सरकारी आंकड़ा है, इसलिए उन्हें शक है कि इससे तीन गुना पेड़ कटेंगे। उनका कहना था कि इससे पर्यावरण बर्बाद हो रहा है और हमारी संवेदनशीलता खत्म होती जा रही है। गलत चीजों का विरोध किए बिना ये रुकेंगी नहीं, और इसके लिए जो भी कानूनी प्रक्रिया जरूरी होगी, वे करेंगे।
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