कर्जत प्रकल्प पर्यावरण के अनुकूल, फडणवीस बोले- विरोधी फैला रहे झूठा नैरेटिव
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रायगड के कर्जत में प्रस्तावित टोरेंट पावर के प्रोजेक्ट पर विरोधियों के आरोपों को खारिज किया।
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रायगड जिले के कर्जत तालुका में टोरेंट पावर कंपनी का जलविद्युत ऊर्जा भंडारण प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इसे लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विरोधियों और पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया था कि प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं और इसी बात पर उन्होंने सरकार को घेरा था। अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस विवाद पर सीधे जवाब देते हुए विरोधियों के आरोप को खारिज कर दिया है।
फडणवीस ने कहा कि कर्जत पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है और विरोधियों की तरफ से सिर्फ फेक नैरेटिव (Fake Narrative) फैलाने का काम चल रहा है। उन्होंने साफ किया कि झूठा नैरेटिव खड़ा करना महाराष्ट्र के खिलाफ काम है।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि इस प्रोजेक्ट से किसी की रोजी-रोटी खत्म नहीं होगी। अगर कभी ऐसे हालात बने तो उनके पुनर्वास पर ठीक से विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी वादा किया कि पूरा प्रोजेक्ट कानून के दायरे में रहकर ही पूरा किया जाएगा।
पत्रकारों से बात करते हुए फडणवीस ने कहा, "समाज के सभी घटकों का विचार करके ही इस प्रोजेक्ट की योजना बनाई गई है। लेकिन सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस विकास प्रोजेक्ट का विरोध किया जा रहा है, तो यह बिल्कुल गलत है।"
विरोधियों के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत सामने रखते हुए कुछ अहम जानकारी जारी की है। सरकार के मुताबिक यह गुजरात का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र का प्रोजेक्ट है। इसमें आने वाला निवेश, रोजगार और बनने वाली बिजली, सब कुछ महाराष्ट्र को ही मिलेगा।
सरकार का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से 30,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा और महाराष्ट्र को 12,000 मेगावॉट साफ बिजली मिलेगी। यह प्रोजेक्ट कोयले पर नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा पर आधारित है, इसलिए पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा और यह पर्यावरण के अनुकूल साबित होगा।
पेड़ों को लेकर सरकार ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए 233 हेक्टेयर जमीन लगेगी, जबकि कंपनी ने पहले ही वन विभाग को 253 हेक्टेयर जमीन सौंप दी है। इस इलाके में टोरेंट कंपनी 60,000 और वन विभाग 30,000, यानी कुल 90,000 नए पेड़ लगाएगा।
सरकार के मुताबिक यह प्रोजेक्ट भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से 16 किमी और ज्योतिर्लिंग मंदिर से 20 किमी दूर है। यह पूरा इलाका इको-सेन्सिटिव ज़ोन (ESZ) के बाहर है।
प्रदूषण और पानी को लेकर सरकार ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से हर साल 4.6 दशलक्ष टन कोयला जलने और 40 लाख गाड़ियों के कार्बन उत्सर्जन के बराबर प्रदूषण टलेगा। साथ ही हर साल 19.7 अब्ज लीटर कूलिंग वॉटर की बचत होगी, जो 4 लाख लोगों के लिए काफी होता है।
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