भीमाशंकर में पेड़ों की कटाई फौरन रुके, ओमराजे निंबाळकर की अपनी सरकार से मांग
शिंदे गुट के सांसद ओमराजे निंबाळकर ने पेड़ कटाई रोकने की मांग की, अनिल परब ने फडणवीस पर निशाना साधा।
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रायगड के कर्जत तालुका में साय डोंगर इलाके में पेड़ों की कटाई चल रही है। इसके खिलाफ आज ठाकरे की सेना ने मोर्चा निकालकर विरोध जताया। आदित्य ठाकरे की अगुवाई में सैकड़ों शिवसैनिक इस जंगल में पहुंचे। शिवसेना नेता अनिल परब ने सरकार पर हमला बोला और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को निशाने पर लिया। विधायक आदित्य ठाकरे ने भी मौके पर जाकर आंदोलन करने वालों को अपना समर्थन दिया और मुख्यमंत्री फडणवीस पर निशाना साधा।
अब शिंदे की शिवसेना के सांसद ओमराजे निंबाळकर ने भी पेड़ कटाई का विरोध किया है। विधायक आदित्य ठाकरे और रोहित पवार के बाद धाराशिव के इस सांसद ने भी भीमाशंकर में हो रही कटाई पर एतराज जताया। ओमराजे निंबाळकर ने कहा कि यह कटाई दुर्भाग्यपूर्ण है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक पेड़ को बड़ा होने में 150 से 250 साल लग जाते हैं। उनके मुताबिक कुदरत को नुकसान पहुंचाने के नतीजे क्या होते हैं, इसका अनुभव हम आज कर रहे हैं। इसी बात को लेकर उन्होंने सरकार के रुख पर सवाल खड़े किए।
निंबाळकर ने यह भी मांग की कि अगर किसी प्रोजेक्ट के लिए पेड़ काटना टाला न जा सके, तो एक पेड़ के बदले 100 पेड़ लगाए जाएं। साथ ही उन्हें कुछ साल तक जिंदा रखने की जिम्मेदारी भी तय की जाए। उन्होंने कहा कि आज कुदरत की मनमानी की मार किसानों को झेलनी पड़ रही है, ऐसे में सरकार को पेड़ कटाई रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
उधर अनिल परब ने आरोप लगाया कि फडणवीस सह्याद्री के पेड़ काटकर इस प्रोजेक्ट को पर्यावरण वाला प्रोजेक्ट बता रहे हैं, जबकि वे सिर्फ अपने दोस्तों के लिए पेड़ों की कत्ल कर रहे हैं। परब के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 32 हजार से ज्यादा पेड़ कटेंगे। लेकिन विरोधियों ने यह गंभीर बात सामने रखी है कि असल में 7 से 8 लाख पेड़ कटने वाले हैं।
परब ने कहा कि वन विभाग के आंकड़े कभी सही नहीं होते। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की वन संपदा को मुगलों ने भी इस तरह हाथ नहीं लगाया था, लेकिन इस सरकार ने यह काम कर दिखाया है। उनका आरोप है कि सरकार लोगों की आंखों में धूल झोंक रही है।
परब ने यह भी कहा कि बिजली बनाने में बारिश अहम है और बारिश के लिए पेड़ अहम हैं। उनके मुताबिक इससे सिर्फ कोकण ही नहीं, पूरे महाराष्ट्र के साथ अन्याय हो रहा है।
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