सपकाल ने रायगड के कर्जत में टोरेंट पावर प्रोजेक्ट पर कोर्ट जाने की चेतावनी दी
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महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कर्जत-भीमाशंकर इलाके में प्रस्तावित प्रोजेक्ट को लेकर बड़े पैमाने पर पेड़ कटने का आरोप लगाया है।
महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गुरुवार को चेतावनी दी कि टोरेंट पावर के प्रस्तावित प्रोजेक्ट के खिलाफ वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। यह प्रोजेक्ट रायगड जिले के कर्जत-भीमाशंकर इलाके में आना है। सपकाल का आरोप है कि इसकी वजह से सह्याद्रि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाएंगे।
सपकाल ने प्रस्तावित प्रोजेक्ट वाली जगह का दौरा किया और वहां के गांव वालों से बात की। इसके बाद उन्होंने भाजपा की अगुवाई वाली महायुति सरकार पर आरोप लगाया कि वह प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ कटने की इजाज़त दे रही है।
सपकाल ने कहा, "भाजपा की अगुवाई वाली महायुति सरकार गुजरात की एक कंपनी के फायदे के लिए सह्याद्रि क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत से समझौता कर रही है। सरकार का यह दावा खोखला है कि प्रोजेक्ट से हज़ारों नौकरियां मिलेंगी और कटाई की भरपाई के लिए दूसरी जगह लाखों पेड़ लगाए जाएंगे।"
उन्होंने राज्य सरकार के पहले किए गए 33 करोड़ पेड़ लगाने के वादे का भी ज़िक्र किया और सवाल उठाया कि उस पहल का क्या हुआ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का हवाला देते हुए सपकाल ने कहा कि कांग्रेस ने इसी पहल के तहत कर्जत के जंगल में पेड़ लगाए थे।
सपकाल ने सवाल किया, "यह (बिजली) प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के हित में नहीं है। सरकार इसके रोज़गार और पर्यावरण पर असर को लेकर लोगों को गुमराह कर रही है। जिस प्रोजेक्ट को सरकार तकनीक के लिहाज़ से बेहद उन्नत बता रही है, वह हज़ारों नौकरियां कैसे पैदा करेगा?"
प्रोजेक्ट का नाम सैदोंगर-1 पम्प्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट है और यह कर्जत तहसील में प्रस्तावित है। यह 3,000 मेगावाट की हाइड्रो-एनर्जी योजना है, जिसमें 13,505 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। कहा गया है कि इससे ग्रिड की भरोसेमंदी और महाराष्ट्र समेत दूसरे इलाकों की ऊर्जा सुरक्षा को मदद मिलेगी। प्रोजेक्ट की जगह भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से करीब 16 किलोमीटर और भीमाशंकर मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूर है।
पर्यावरण को लेकर उठी चिंताओं के बीच टोरेंट पावर ने 25 अक्टूबर को प्रोजेक्ट का बचाव किया था। कंपनी का कहना था कि प्रोजेक्ट भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से करीब 16 किलोमीटर दूर है और इसके सारे हिस्से अभयारण्य और उसके इको-सेंसिटिव ज़ोन के बाहर पड़ते हैं।
कंपनी ने यह भी कहा कि सौर और दूसरे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ यह प्रोजेक्ट ग्रिड को स्थिर रखने में मदद करेगा और शाम की पीक घंटों में कोयले से बनने वाली बिजली पर निर्भरता घटाएगा। अभयारण्य के अंदर पेड़ कटने की खबरों को कंपनी ने गलत जानकारी पर आधारित बताकर खारिज किया।
इस बीच कांग्रेस के एक बयान के मुताबिक सपकाल शुक्रवार को पालघर जिले में प्रस्तावित वाढवण बंदरगाह के खिलाफ होने वाले जन आंदोलन में शामिल होने वाले हैं।
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