कर्जत में 3,000 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए 32,490 पेड़ों की कटाई शुरू
कर्जत में पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए 32,490 पेड़ काटे जा रहे हैं। पर्यावरण कार्यकर्ता और विपक्षी नेता सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।
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कर्जत के हरे इलाके पर कुल्हाड़ी चल पड़ी है। 3000 मेगावाट के पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए वहां 32,490 पेड़ काटे जाने हैं और कटाई शुरू हो चुकी है। इससे इलाके की समृद्ध जैव विविधता पर असर को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता चिंता में हैं। शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने भी इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों के जाने पर सरकार को घेरा है।
कर्जत ईस्ट के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर ने 14 अक्टूबर को एक पत्र जारी किया था। इसमें प्रस्तावित सैदोंगर I कर्जत ऑफ-स्ट्रीम ओपन लूप पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए 32,490 पेड़ फौरन काटने का निर्देश दिया गया। यह प्रोजेक्ट कर्जत तालुका के पाली, कोटल खलाटी, सैदोंगर और ढाक गांवों में फैला है।
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक प्रोजेक्ट के लिए 233 हेक्टेयर जंगल की जमीन लेनी होगी। इसमें 197.0272 हेक्टेयर आरक्षित वन, 26.066 हेक्टेयर निजी वन और 9.9068 हेक्टेयर संरक्षित वन है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट को केंद्र और राज्य, दोनों स्तर की मंजूरी मिल चुकी है।
कर्जत तालुका पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रही है। समिति से जुड़े वकील कैलाश मोरे ने कहा, "जैव विविधता से भरे इस इलाके में प्रस्तावित सैदोंगर I कर्जत पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए 32,490 पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है। ऐसे वक्त में जब महाराष्ट्र सूखे से जूझ रहा है और जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ रहा है, जंगल का इतना बड़ा हिस्सा उजाड़ने से पर्यावरण का संकट और गहरा ही होगा। अनगिनत पंछी, जंगली जानवर और रेंगने वाले जीव अपना बसेरा खो देंगे। क्या अधिकारियों को इस विनाश के भयानक नतीजों की कोई परवाह है?"
पर्यावरण कार्यकर्ताओं को डर है कि पेड़ घटने से वन्यजीवों के ठिकानों पर असर पड़ सकता है, पर्यावरण का संतुलन बिगड़ सकता है और जंगल के टुकड़े और बिखर सकते हैं।
आदित्य ठाकरे ने X पर लिखा, "कर्जत तालुका में गुजरात की कंपनी 'टोरेंट पावर' के हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए हजारों पेड़ बेधड़क काटे जा रहे हैं। 'सैदोंगर' इलाके की समृद्ध प्राकृतिक दौलत मिटाई जा रही है और स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के विरोध को पैरों तले रौंदा जा रहा है। यह कत्लेआम किसकी शह पर चल रहा है?"
NCP (SP) नेता रोहित पवार ने अपनी लंबी X पोस्ट में कहा कि यह सिर्फ पेड़ों की कटाई नहीं है, यह पूरे इकोसिस्टम का अंत है और इसके गंभीर नतीजे आगे चलकर इंसानों को भुगतने होंगे। उन्होंने लिखा, "यह घना जंगल हमारे राज्य पशु भेकर (barking deer) और कई दूसरे जानवरों का असली घर है। कीमती औषधीय पौधे, दुर्लभ कीड़े और सह्याद्रि की इस कतार की खास जैव विविधता इस बेमतलब कत्लेआम से हमेशा के लिए खत्म होने की राह पर हैं। इतना ही नहीं, इस प्रोजेक्ट के लिए पहाड़ों में सुरंग बनाने के जोरदार धमाकों से पहाड़ियों के पूरे हिस्से कमजोर होंगे और मालिन या इरशालवाडी जैसी आपदा दोहराए जाने का खतरा है। कर्जत जैसे कुदरती तौर पर खूबसूरत इलाके में जंगल की दौलत उजड़ी तो पर्यावरण का संतुलन बिगड़ेगा और स्थानीय आदिवासी समुदायों के वजूद का सवाल खड़ा हो जाएगा।"
इस मुद्दे पर बॉलीवुड से भी आवाज उठी है। अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने मुंबई की AQI का एक वीडियो X पर डालते हुए लिखा, "मुंबई के नागरिकों, आप किस बात से डर रहे हैं? पीने के पानी में सचमुच मल मिला है और हवा में जहर है। जहर जान ले लेता है, मौत से बदतर क्या होगा? दुनिया की सबसे अमीर नगर निकाय @mybmc को ऐसा लगता क्यों है कि वह आपके साथ यह करके बच निकलेगी?"
ऋचा चड्ढा ने आगे लिखा, "तीन-तीन मुख्यमंत्री जैसे हैं, हवा के लिए प्लान क्या है? सड़कें तो हमेशा से खराब थीं, अब हवा और पानी भी गंदे हैं। आप इतना टैक्स क्यों भरते हैं कि धीमे जहर से मरें? मुंबई केंद्र को इतना टैक्स देती है, बदले में उसे क्या मिलता है? 7500 और पेड़ काटे जाने हैं। मुट्ठी भर पर्यावरण कार्यकर्ता ही आपके लिए लगातार आवाज क्यों उठाएं? क्या आप डरपोक हैं? सारी हिम्मत का ठेका आपने नौजवानों को क्यों दे दिया? सवाल पूछिए, आवाज उठाइए! आप इसके लायक नहीं हैं!"
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