साय डोंगर में पेड़ कटे, पर हरित ऊर्जा जरूरी, 300 करोड़ पेड़ लगाएंगे: बावनकुळे
कर्जत-भीमाशंकर के साय डोंगर में पेड़ कटाई पर पूरे राज्य में गुस्सा है। मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने कहा कि हरित ऊर्जा ज्यादा अहम है और 300 करोड़ पेड़ लगाए जाएंगे।
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कर्जत-भीमाशंकर के साय डोंगर में चल रही पेड़ों की कटाई को लेकर इन दिनों पूरे राज्य में गुस्सा है। स्थानीय लोग इस कटाई का विरोध कर रहे हैं। टोरंट प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने जो फैसला लिया है, उसका भी वे सीधे विरोध कर रहे हैं। इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अपनी बात रखी है।
बावनकुले ने कहा कि सैकड़ों गुना ज्यादा पेड़ लगाने का फैसला लिया गया है। उनके मुताबिक अगर ऐसे प्रोजेक्ट हाथ से चले गए तो हम विकसित नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि अपारंपरिक प्रोजेक्ट का विरोध करना यानी पर्यावरण का विरोध करना है। पेड़ कटें और उनकी 10 गुना लगाए जाएं, तब भी यह मैनेजेबल है, ऐसा भी उन्होंने कहा। बावनकुले ने माना कि पेड़ काटे जा रहे हैं, पर उनके हिसाब से हरित ऊर्जा उससे ज्यादा अहम है। कितने गुना पेड़ लगाने चाहिए, यह भी देखना होगा। उन्होंने बताया कि हम 300 करोड़ पेड़ लगाने वाले हैं।
मनसे प्रमुख राज ठाकरे कर्जत आने वाले हैं। इस पर बावनकुले ने कहा कि प्रोजेक्ट वहीं होगा जहां उसकी वायबिलिटी है, आजाद मैदान में प्रोजेक्ट नहीं हो सकता। उनका कहना था कि इस प्रोजेक्ट से पर्यावरण का नुकसान नहीं होता, यह बात समझनी चाहिए। राज साहब से उनकी गुजारिश है कि राजनीति न हो। उन्हें भरोसा है कि राज ठाकरे समझेंगे, और जरूरत पड़ी तो उनके अधिकारी राज ठाकरे को समझाएंगे। बावनकुले ने यह भी कहा कि राज्य में कम रेट पर बिजली कौन देता है, कोई भी कंपनी हो, राज्य का हित इसी में है कि हाइड्रो प्रोजेक्ट आएं, और हाइड्रो वहीं लगते हैं जहां पानी है। उन्होंने कहा कि मुझे राजनीति में नहीं जाना। लवासा में जमीनें हड़पे जाने को लेकर भी उन्होंने अपना मत रखा। उनके मुताबिक यह प्रोजेक्ट राज्य को बिजली देने वाला है और विकसित महाराष्ट्र के लिए है।
सूखे की तैयारी पर बावनकुले ने बताया कि जिलाधिकारी समिति को जानवरों का चारा मुहैया कराने, जरूरत के हिसाब से खेती कराने और जरूरी बातों का नियोजन करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने एसओपी दी है। गीला चारा 8 रुपये और सूखा चारा 12 रुपये किलो तय किया गया है। ट्रांसपोर्ट के लिए अलग से पैसे दिए जाएंगे। नल योजनाएं पूरी की जा रही हैं, लेकिन जहां पानी है और बिजली कनेक्शन नहीं हैं, वहां डीपीडीसी से पैसे देने को कहा गया है। सूखा राहत की सूची में कुछ तहसीलें फिर से जोड़ी जा सकती हैं, जिनमें रायगढ़ और कोल्हापुर की तहसीलें हो सकती हैं। फैसला यह भी हुआ है कि जनप्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों और इनकम टैक्स भरने वाले किसानों को 5 हजार रुपये नहीं मिलेंगे।
सड़क के कामों में मुरम, गिट्टी और गाद का इस्तेमाल हुआ तो उस पर रॉयल्टी नहीं लगेगी। तालाब गहरा करने से निकली गाद पर 31 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर और ट्रांसपोर्ट पर 35 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर का रेट लगेगा। सूखे के उपाय आदिवासी और सामाजिक न्याय विभाग भी लागू करेंगे, जिससे किसानों को फायदा होगा। सिंधुदुर्ग जिले में चारा उपलब्ध है, उसे आसपास के जिलों में भी इस्तेमाल किया जाएगा। डीपीडीसी से मत्स्य विभाग को भी पैसे दिए जाएंगे।
बावनकुले ने यह भी बताया कि आज कैबिनेट और देवेंद्र फडणवीस ने धुले जिले में 700 एकड़ जमीन में रावेर में एमआईडीसी बनाने की बात कही है। राजस्व विभाग की जमीन सिर्फ 9 करोड़ रुपये में एमआईडीसी को दी गई है। उनके मुताबिक रावेर में अच्छी एमआईडीसी बनेगी और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला हुआ है।
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