सरकारी और PPP अस्पतालों में PET-CT स्कैन का रेट Rs 10,250 तय, कंट्रास्ट के भी दाम बंधे
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महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी और PPP अस्पतालों में कैंसर मरीजों के PET-CT स्कैन का चार्ज Rs 10,250 तय किया है।
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी अस्पतालों और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलने वाली हेल्थकेयर सुविधाओं में कैंसर मरीजों की PET-CT जांच का चार्ज Rs 10,250 तय कर दिया है। अलग-अलग तरीके से बिलिंग न हो, इसलिए CT और MRI स्कैन में काम आने वाले कंट्रास्ट एजेंट के भी एक जैसे रेट लागू किए गए हैं।
राज्य के मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने इसका ऑर्डर जारी किया है। ऑर्डर के मुताबिक नए PET-CT रेट में FDG (फ्लोरोडॉक्सीग्लूकोज) रेडियोट्रेसर शामिल है, और जहां ज़रूरत हो वहां कंट्रास्ट एजेंट भी। यह रकम महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (MJPJAY) और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत तय Rs 20,500 के पैकेज पर 50% की छूट देकर निकाली गई है।
जो मरीज इन सरकारी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम में कवर नहीं हैं, लेकिन सरकारी या PPP अस्पतालों में जांच कराते हैं, उन्हें भी इस रेट का फायदा मिलेगा। प्राइवेट अस्पताल और इंडिपेंडेंट डायग्नोस्टिक लैब इस ऑर्डर के दायरे से बाहर रखे गए हैं।
PET-CT स्कैन कैंसर का पता लगाने, उसके फैलने की जानकारी लेने, बीमारी का स्टेज देखने और इलाज का असर मॉनिटर करने के लिए किया जाता है। इसी वजह से इस फैसले से कैंसर मरीजों का डायग्नोस्टिक खर्च कम होने की उम्मीद है। यह कदम सरकार के 17 अक्टूबर के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें MJPJAY और PMJAY के तहत PET-CT जांच को शामिल किया गया था।
कंट्रास्ट एजेंट के रेट भी तय हुए हैं। CT स्कैन में इस्तेमाल होने वाले कंट्रास्ट का चार्ज 50 ml के लिए Rs 420 और 100 ml के लिए Rs 830 होगा। MRI जांच में काम आने वाले गैडोलीनियम-बेस्ड कंट्रास्ट की कीमत 10 ml के लिए Rs 950 रखी गई है। यह स्टैंडर्डाइजेशन डायरेक्टरेट ऑफ़ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (DMER) की उस चिंता के बाद किया गया, जो अस्पतालों में कंट्रास्ट की कीमतों के अंतर को लेकर उठाई गई थी।
बदली हुई गाइडलाइंस में कहा गया है कि 4 जुलाई, 2017 के सरकारी आदेश के तहत मुफ्त सेवाओं के लिए एलिजिबल मरीजों को जांच बिना पेमेंट के मिलती रहेगी। MJPJAY और PMJAY के बेनिफिशियरी को भी एलिजिबल सेवाएं मुफ्त मिलेंगी, जबकि बाकी मरीजों को तय रेट पर पेमेंट करना होगा।
अस्पतालों को मराठी और इंग्लिश में चार्ज साफ़ दिखाने, मरीजों का अलग रिकॉर्ड रखने और डिजिटल मॉनिटरिंग डैशबोर्ड शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। कंट्रास्ट की क्वांटिटी इलाज करने वाले मेडिकल ऑफिसर से सर्टिफ़ाई करानी होगी, और थोड़ी इस्तेमाल हुई वायल के लिए प्रोपोर्शनल बिलिंग पर रोक लगा दी गई है।
PPP एग्रीमेंट के तहत काम करने वाले प्राइवेट डायग्नोस्टिक ऑपरेटर अब मरीजों से सीधे पेमेंट नहीं ले सकेंगे। सारे ट्रांज़ैक्शन अस्पताल के बिलिंग काउंटर से प्रोसेस होने चाहिए, और ऑपरेटर को हर महीने पेमेंट किया जाना चाहिए। इसका उल्लंघन कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन माना जाएगा और एग्रीमेंट के तहत कार्रवाई हो सकती है।
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