कर्जत के पंप-स्टोरेज प्रोजेक्ट पर फडणवीस ने रखा सरकार का पक्ष, विपक्ष पर लगाया आरोप
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि प्रोजेक्ट सभी जरूरी मंजूरियों से गुजरा है और विपक्ष राजनीतिक फायदे के लिए गलत प्रचार फैला रहा है।
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रायगड जिले के कर्जत में 'टॉरेंट पॉवर' का एक 'पंप-स्टोरेज' जलविद्युत परियोजना प्रस्तावित है। इसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इसी बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रोजेक्ट के पक्ष में अपनी बात रखी है।
बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई जा रही है। फडणवीस ने विपक्षी पार्टियों पर आरोप लगाया कि वे राजनीतिक फायदे के लिए "झूठा नैरेटिव" यानी गलत प्रचार फैला रही हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र की स्वच्छ ऊर्जा की जरूरतें पूरी करने में मदद करेगा।
प्रोजेक्ट में वनजमीन का इस्तेमाल होगा और हजारों पेड़ काटने का प्रस्ताव है। इसी वजह से पर्यावरण से जुड़े लोगों और विपक्ष के नेताओं ने इसकी आलोचना की है। फडणवीस ने कहा कि यह प्रोजेक्ट सभी जरूरी मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरा है और जिन निवासियों पर असर पड़ेगा, उनकी चिंताओं पर भी विचार किया जाएगा।
राज्य सरकार और 'टॉरेंट पॉवर' के मुताबिक यह प्रोजेक्ट खासकर शाम और रात के वक्त काम आएगा, जब सौर ऊर्जा का उत्पादन कम हो जाता है। उस वक्त बिजली की मांग पूरी करने में इससे मदद मिलेगी।
'पंप-स्टोरेज' सिस्टम में अतिरिक्त बिजली से पानी को ऊंचाई पर बने जलाशय में जमा किया जाता है। जब बिजली की मांग बढ़ती है, तब वह पानी नीचे छोड़ा जाता है और उससे बिजली बनाई जाती है।
उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट से महाराष्ट्र में बड़ा निवेश आएगा और रोजगार के मौके बनेंगे। कंपनी का दावा है कि इससे कोयले से बनने वाली बिजली पर निर्भरता घटेगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।
फडणवीस ने बताया कि प्रोजेक्ट की जगह भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से करीब 16 किमी और भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर से 20 किमी दूर है। कंपनी और वन विभाग की जानकारी के मुताबिक प्रोजेक्ट के हिस्से अभयारण्य की सीमा और तय किए गए 'इको-सेंसिटिव ज़ोन' यानी पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र के बाहर हैं।
इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 233 हेक्टेयर वनजमीन चाहिए। सरकारी सूत्रों के मुताबिक भरपाई के तौर पर वनीकरण के लिए 'टॉरेंट पॉवर' ने 253 हेक्टेयर निजी जमीन वन विभाग को दी है।
कंपनी की योजना प्रोजेक्ट इलाके में करीब 60,000 पेड़ लगाने की है। वन विभाग और 30,000 पेड़ लगाएगा। यानी कुल 90,000 पेड़ लगाने का प्लान है।
'टॉरेंट पॉवर' ने यह भी बताया है कि सारी जरूरी इजाजतें मिलने से पहले इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 18 महीने की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसमें पर्यावरण का मूल्यांकन, जनसुनवाई, विशेषज्ञ समिति की समीक्षा और मौके पर जाकर जगह की जांच जैसे चरण शामिल थे।
पर्यावरण को लेकर चिंता बनी हुई है। सरकार के आश्वासन के बावजूद प्रस्तावित पेड़ कटाई और वनजमीन के हस्तांतरण से स्थानीय इकोसिस्टम और वन्यजीवों के रहने की जगहों पर होने वाले असर को लेकर फिक्र बढ़ी है। पर्यावरण से जुड़े लोगों और विपक्ष के नेताओं ने सवाल उठाया है कि क्या प्रस्तावित वनीकरण से मौजूदा जंगलों को होने वाले नुकसान की पूरी भरपाई हो पाएगी।
फडणवीस ने कहा कि अगर इस प्रोजेक्ट की वजह से स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ा, तो सरकार पुनर्वास के उपायों पर विचार करेगी। उन्होंने यह दलील भी दी कि नवीकरणीय ऊर्जा की सप्लाई को संतुलित रखने और राज्य में बढ़ती बिजली की मांग पूरी करने के लिए पंप्ड-स्टोरेज सुविधाएं अहम हैं।
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