शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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बोध कीर्तन के विमोचन में राऊत की चुटकी, मंच पर उद्धव और राज ठाकरे भी मौजूद

बोध कीर्तन के विमोचन में राऊत की चुटकी, मंच पर उद्धव और राज ठाकरे भी मौजूद तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 संस्कृति डेस्क

शिवसेना सांसद संजय राऊत की किताब बोध कीर्तन का विमोचन हुआ। उन्होंने जेल के 105 दिन, साहित्य और मोदी के भाषण पर बात की।

शिवसेना सांसद संजय राऊत की लिखी किताब "बोध कीर्तन" का विमोचन समारोह हुआ। कार्यक्रम में शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे, मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे और लेखक अंबरिश मिश्र प्रमुख मेहमान थे। मंच से राऊत ने खूब चुटकियां लीं। उन्होंने कहा, "संजय राऊत आध्यात्मिक नहीं हो सकते क्या? वे तो रोज 10 बजे कीर्तन करते हैं।"

राऊत ने बताया, "महाराष्ट्र में हर किताब का एक उत्सव मनाया जाए, इसलिए मैं अपनी हर किताब का कार्यक्रम करता हूं।" उनका कहना था कि खाने और कपड़ों के उत्सव तो हम हमेशा मनाते हैं, लेकिन महाराष्ट्र की राजधानी में मराठी साहित्य के लिए लोग इकट्ठा होते हैं और संवाद करते हैं, यह साबित करने के लिए ऐसे साहित्यिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

किताब के नाम को लेकर राऊत ने कहा, "अच्छा वक्ता अच्छा कीर्तनकार भी होना चाहिए।" उनके मुताबिक "बोध कीर्तन" नाम सुनकर कुछ लोगों को लगता है कि राऊत आध्यात्मिक कैसे हो सकते हैं। राऊत ने कहा कि वक्ता के पास कहने लायक कुछ हो, तभी वह अच्छा कीर्तन कर सकता है, और ऐसे ही कीर्तनकार को ज्यादा श्रोता मिलते हैं।

जेल के दिनों का जिक्र करते हुए राऊत बोले, "मुझे जेल में जो 105 दिन मिले, उनमें कोई काम ही नहीं था। बीच-बीच में लेखकों को जेल भेजना चाहिए, इससे बेहतरीन साहित्य तैयार होगा।" उन्होंने कहा कि वीर सावरकर, लोकमान्य तिलक, जयप्रकाश नारायण, गोर्की, स्टालिन और लेनिन का उम्दा साहित्य जेल में ही लिखा गया और क्रांति की चिंगारी भी वहीं पड़ती है।

राऊत ने जेल की एक बात भी सुनाई। उनके मुताबिक, "हमें जिस कोठरी में रखा गया था, उसके बगल में 2-बीएचके हॉल जैसी खूबसूरत कोठरी थी।" जब वे जेलर से वहां शिफ्ट करने को कहते, तो जेलर बताता कि लंदन की कोर्ट को यह दिखाने के लिए कि मानवाधिकारों का पालन हो रहा है, वह कोठरी नीरव मोदी या विजय माल्या के लिए रखी गई है।

अपने भाषण में राऊत ने पूछा, "मोदी क्या मेरे निजी दुश्मन हैं?" उन्होंने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा के मौके पर प्रभु श्रीराम पर दिया गया मोदी का भाषण उन्होंने जेल में रहते हुए सुना और लिखकर रखा। राऊत के मुताबिक सामने टेलिप्रॉम्प्टर नहीं था और वह भाषण अपने आप निकला, गैर-राजनीतिक भाषण था। उनकी अब तक के सभी भाषणों में वह एक बेहतरीन नमूना था, इसलिए उसे किताब में शामिल किया गया है। राऊत ने कहा, "मैं भी इंसान हूं, हमें भी भावनाएं होती हैं, कविताएं पसंद हैं।"

राऊत ने यह भी बताया कि मशहूर कवि ग्रेस "सामना" में उनके केबिन में आकर घंटों बैठा करते थे। ऐसे कई साहित्यिक दोस्तों से हुई बातचीत से ही यह किताब आकार में आई है।

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