टोरेंट पावर के रायगढ़ प्रोजेक्ट पर आशीष शेलार का बचाव, पेड़ कटाई पर आदित्य ठाकरे को घेरा
महाराष्ट्र के मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि राज्य में आने वाला हर उद्योग पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाएगा।
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महाराष्ट्र के सूचना प्रौद्योगिकी और AI मंत्री आशीष शेलार ने रविवार को रायगढ़ में टोरेंट पावर के हाइड्रो-एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए हो रही पेड़ कटाई को लेकर उठी चिंताओं को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि राज्य में जो भी औद्योगिक प्रोजेक्ट आएंगे, वे सब पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाएंगे।
शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे ने इस प्रोजेक्ट की आलोचना की थी। इस पर शेलार ने कहा कि विपक्ष के इस नेता को पर्यावरण के मुद्दों पर बोलने का कोई नैतिक हक नहीं है। उनका आरोप है कि शिवसेना (UBT) की अगुवाई वाली पिछली सरकार मुंबई में प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही।
शेलार ने पत्रकारों से कहा, "आदित्य ठाकरे को पर्यावरण पर बोलने का कोई हक नहीं है। जब वे राज्य के पर्यावरण मंत्री थे, तब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मुंबई के मानखुर्द-गोवंडी इलाकों की उन कंपनियों को बंद करने के आदेश दिए थे, जिन पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगा था और जिनसे प्रदूषण का खतरा बताया गया था। इसके बावजूद उनकी पार्टी और सरकार ने कार्रवाई न करने का फैसला किया।"
टोरेंट पावर के प्रोजेक्ट के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं है। फिर भी उन्होंने भरोसा दिलाया कि महाराष्ट्र में आने वाला कोई भी उद्योग पर्यावरण के नियमों का पालन करेगा। उन्होंने कहा, "मुझे टोरेंट प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन मैं यह भरोसा जरूर दे सकता हूं कि यहां आने वाला हर उद्योग पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाएगा।"
यह सैदोंगर-1 पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट है। यह रायगढ़ जिले की कर्जत तहसील में बनने वाला 3,000 MW का हाइड्रो-एनर्जी प्रोजेक्ट है। उम्मीद है कि इससे महाराष्ट्र और दूसरे इलाकों में ग्रिड की भरोसेमंदी और ऊर्जा सुरक्षा को मदद मिलेगी। इसमें 13,505 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है।
प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाने का पर्यावरण कार्यकर्ता और विपक्षी पार्टियां विरोध कर रही हैं। इनमें शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) भी शामिल हैं।
आदित्य ठाकरे ने शनिवार को आरोप लगाया कि इस प्रोजेक्ट के लिए हजारों पेड़ बेहिसाब काटे जा रहे हैं। उन्होंने वन विभाग की दी हुई इजाजत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अधिकारियों पर यह भी इल्जाम लगाया कि वे पर्यावरण की चिंता और स्थानीय लोगों के विरोध से ज्यादा तरजीह निजी कंपनियों को दे रहे हैं।
कर्जत पर्यावरण बचाओ समिति के नेता कैलाश मोरे ने कहा कि अगर पेड़ों की कटाई नहीं रोकी गई तो संगठन के सदस्य आंदोलन करेंगे। एक अधिकारी के मुताबिक केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 6 अक्टूबर को इस प्रोजेक्ट के लिए 233 हेक्टेयर जंगल की जमीन के इस्तेमाल और 48,000 पेड़ काटने की आखिरी मंजूरी दी थी।
राज्य की बिजली राज्यमंत्री मेघना बोर्डीकर ने शनिवार को ठाकरे पर आरोप लगाया कि वे अधूरी जानकारी के आधार पर प्रोजेक्ट का विरोध करके लोगों में भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, "राज्य में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने इसे मंजूरी दी है, और केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय की सारी शर्तें पूरी करने के बाद ही प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली।"
बोर्डीकर ने ठाकरे से कहा कि वे विकास के कामों में रुकावट डालना बंद करें और प्रोजेक्ट की आलोचना करने से पहले तथ्य समझ लें। उनके मुताबिक यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए अहम है।
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