कर्जत में पेड़ कटाई पर संदीप देशपांडे का फडणवीस पर वार, पूछा कौन सा विकास
मनसे नेता संदीप देशपांडे ने रायगड के कर्जत में टोरेंट पावर के प्रस्तावित प्रोजेक्ट और पेड़ों की कटाई को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
रायगड जिले के कर्जत तालुका में टोरेंट पावर कंपनी का जलविद्युत ऊर्जा भंडारण प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का दावा है कि यह प्रोजेक्ट राज्य के हित में है और इससे हजारों रोजगार पैदा होंगे। इसी दावे पर मनसे नेता संदीप देशपांडे ने तीखा हमला बोला है।
देशपांडे सोमवार को मुंबई में बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। उन्होंने पूछा कि फडणवीस के कहे मुताबिक वहां पेड़ कहां से लगाए जाएंगे। फडणवीस 90 हजार पेड़ लगाने की बात कर रहे हैं, लेकिन उसके लिए जगह भी तो चाहिए। देशपांडे का कहना था कि यह सब दो गुजरातियों के लिए चल रहा है। उनके मुताबिक गिफ्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट, जहां कमाई का मौका है, गुजरात को मिलते हैं और प्रदूषण करने वाले प्रोजेक्ट महाराष्ट्र को दिए जाते हैं। उन्होंने साफ कहा कि यह नहीं चलेगा।
देशपांडे ने बताया कि राज ठाकरे 28 तारीख की सुबह उस जगह जाकर मुआयना करेंगे और शाम को सभा लेंगे।
टोरेंट प्रोजेक्ट से बनने वाली बिजली किसके लिए है, किस प्रोजेक्ट को इस बिजली की जरूरत पड़ेगी और सरकार यह बिजली किसे सप्लाई करना चाहती है, ये सवाल भी देशपांडे ने उठाए। उन्होंने कहा कि प्रकृति को बर्बाद करके कोई भी विकास हमें नहीं चाहिए।
वन विभाग की तरफ से कहा जाता है कि यह पेड़ कटाई अवैध नहीं है। इस पर देशपांडे ने कहा कि वहां लोगों को सड़क चाहिए थी, तब उनसे कहा गया कि पेड़ काटने पड़ेंगे और सड़क नहीं बन सकती। तो फिर जो कटाई तब अवैध थी, वह अब वैध कैसे हो गई, यह उनका सवाल था।
देशपांडे और अविनाश जाधव रविवार रात कर्जत गए और जहां पेड़ काटे जा रहे हैं, उस जगह को देखा। देशपांडे के मुताबिक वहां का नजारा बहुत भयानक था। 150 साल पुराने पेड़ काट दिए गए हैं। उन्होंने पूछा कि यह कैसा विकास है जिसमें पेड़ काटे जा रहे हैं, और इतने बड़े पैमाने पर कटाई की जरूरत ही नहीं है। उन्होंने सरकार को पेड़खाऊ सरकार कहते हुए सवाल किया कि उसने पेड़ क्यों काटे।
देशपांडे ने बताया कि कर्जत में 28 तारीख को राज ठाकरे सभा करेंगे। उनके मुताबिक उन्हें जो आंकड़ा दिखा, वह 2075 तक का है, जबकि 32 हजार पेड़ काटने की इजाजत दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि वे स्थानीय ग्राम पंचायत में गए थे, जहां उन्हें बताया गया कि पेड़ कटाई के लिए कोई इजाजत ली ही नहीं गई है।
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