कर्जत के जंगल में पेड़ों की कटाई पर मनसे आक्रामक, 27 तारीख को राज ठाकरे की सभा
मनसे नेता संदीप देशपांडे ने कर्जत-भीमाशंकर में पेड़ों की कटाई पर सरकार को घेरा और राज ठाकरे की पोस्ट हटवाने पर पुलिस से सवाल पूछे.
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रायगड जिले के कर्जत तालुका में कर्जत-भीमाशंकर जंगल इलाके में पेड़ों की कटाई को लेकर अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) भी मैदान में उतर आई है. पार्टी के नेता संदीप देशपांडे ने कहा कि इस इलाके में टोरेंट जलविद्युत ऊर्जा भंडारण प्रोजेक्ट (Torrent Project) के लिए हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं. मनसे ने इस प्रोजेक्ट का खुलकर विरोध किया है.
देशपांडे का कहना है कि पेड़ों की कटाई बिना ग्राम पंचायत का प्रस्ताव लिए शुरू कर दी गई. प्रस्ताव मंजूर भी नहीं हुआ था और स्थानीय लोगों को भरोसे में नहीं लिया गया. आदिवासी भाइयों और स्थानीय लोगों का आगे क्या होगा, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई. लोगों के विरोध को दरकिनार करके कटाई चालू कर दी गई, यह उनका आरोप है.
इसी वजह से इसी महीने की 27 तारीख को कर्जत में राज ठाकरे की सभा होगी. देशपांडे के मुताबिक उस सभा में आगे के आंदोलन की दिशा तय की जाएगी.
देशपांडे ने सरकार पर सीधा सवाल दागा. उन्होंने कहा, "क्या सरकार उद्योगपतियों के हवाले जमीनें करने के लिए यह सब कर रही है?" उनके मुताबिक नाशिक में कुंभ मेले के दौरान भी यही हुआ था. उन्होंने यह भी कहा कि वनमंत्री गणेश नाईक इस पर एक शब्द नहीं बोल रहे.
इसी बीच मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने 22 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अदाणी पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की पोस्ट डाली थी. अब उन्होंने यह पोस्ट डिलीट करने का फैसला किया है. राज ठाकरे ने साफ किया कि मुंबई पुलिस आयुक्त की विनती का मान रखते हुए वे पोस्ट हटा रहे हैं.
इस पर भी संदीप देशपांडे ने सरकार की आलोचना की. उन्होंने पूछा कि मुंबई पुलिस को ऐसी विनती करने की जरूरत क्यों पड़ी, इसके पीछे किसका दबाव था और क्या यह उनका काम है. उन्होंने कहा, "बिश्नोई के गुंडे आते हैं, हमला करते हैं, तो क्या यह सब देखने के लिए पुलिस के पास वक्त है? अगर यह लोकतंत्र है, तो क्या यह पुलिस का काम है?"
देशपांडे ने यह भी पूछा कि सरकार आंदोलन से इतना क्यों डर रही है. उनके मुताबिक पूरे देश में असंतोष है और हर जगह आंदोलन चल रहे हैं. इसीलिए कहा जा रहा है कि यह डिलीट करो, वह डिलीट करो. देश में अशांति है, इसलिए सरकार घबराई हुई है. उन्होंने कहा कि आंदोलन करने वालों के सवाल हैं, तो सरकार को उनसे बातचीत करने का रुख अपनाना चाहिए.
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