पौधों की देखभाल के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 2026-27 में 90.72 लाख रुपये मंजूर किए
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राज्य के एफॉरेस्टेशन प्रोग्राम के पौधों की देखभाल का पैसा तभी जारी होगा, जब हर साइट पर कम से कम 90 परसेंट पौधे ज़िंदा हों।
महाराष्ट्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 90.72 लाख रुपये मंजूर किए हैं। यह रकम राज्य भर में अपने एफॉरेस्टेशन प्रोग्राम के तहत लगाए गए पेड़-पौधों की देखभाल पर खर्च होगी। पैसा जारी करने की एक ज़रूरी शर्त भी रखी गई है: हर प्लांटेशन साइट पर कम से कम 90 परसेंट पौधे ज़िंदा होने चाहिए।
राज्य के रेवेन्यू और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने इसके लिए सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किया है। GR के मुताबिक यह रकम तीन पहलों, अमृत वन, पंचायत वन और बेल वन, के तहत तैयार किए गए प्लांटेशन के चौथे साल की देखभाल में लगेगी।
यह मंजूरी ऐसे वक्त आई है जब महाराष्ट्र सूखे से जूझ रहा है। बारिश कम होने और पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने के बाद राज्य के 358 में से 304 तालुकाओं को सूखा-प्रभावित घोषित किया गया है।
2026 के खरीफ सीजन में सूखे से जुड़ी घटनाएं दर्ज होने के बाद सरकार ने इन इलाकों में मिट्टी और पानी बचाने के काम शुरू करने का भी आदेश दिया है। सुझाए गए कामों में पानी सोखने वाले गड्ढे बनाना, मौजूदा पानी की जगहों से गाद निकालना और चेक डैम की मरम्मत करना शामिल है। इनका मकसद पानी की उपलब्धता सुधारना, ग्राउंडवाटर रिचार्ज को बेहतर बनाना और सूखा-प्रभावित इलाकों को राहत देना है।
पेड़ लगाने की यह पहल महाराष्ट्र ने 2023 में आजादी का अमृत महोत्सव प्रोग्राम के तहत शुरू की थी, जब भारत की आजादी को 75 साल पूरे हुए थे। इसका मकसद शहरी इलाकों, गांवों और ज़रूरी धार्मिक जगहों पर हरियाली बढ़ाना, बायोडायवर्सिटी को बढ़ावा देना और इकोलॉजिकल बैलेंस को मज़बूत करना है।
अमृत वन के तहत राज्य के 75 बड़े शहरों और ज़रूरी शहरी केंद्रों में खास अर्बन फॉरेस्ट्री गार्डन बनाए जा रहे हैं। ये गार्डन लोकल सेल्फ-गवर्नमेंट बॉडी या फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की ज़मीन पर बन रहे हैं और इनमें देसी पेड़ लगाने पर ज़ोर है।
पंचायत वन में हर ज़िले के 25 चुने हुए गांवों में वुडलैंड क्लस्टर बनाने की योजना है। हर क्लस्टर में पांच ऐसे पेड़ होंगे जो सांस्कृतिक रूप से अहम हों और इकोलॉजी के हिसाब से सही बैठते हों। इससे गांवों का ग्रीन कवर बढ़ने के साथ लोकल बायोडायवर्सिटी और एनवायरनमेंट को लेकर जागरूकता भी बढ़ाने की कोशिश है।
बेल वन के तहत पूरे महाराष्ट्र में 75 खास तीर्थ और धार्मिक जगहों पर पौधे लगाए जा रहे हैं। इनमें पवित्र और दवा वाले पौधे हैं, जैसे बेल, सीता अशोक, रुद्राक्ष, बेर और स्वास्तिक। इसके पीछे सोच यह है कि पर्यावरण की हिफाज़त को राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से जोड़ा जाए।
पैसे को 90 परसेंट पौधों के बचे रहने से जोड़कर सरकार यह पक्का करना चाहती है कि सिर्फ़ पेड़ लगाने के टारगेट पूरे न हों, बल्कि लंबे समय तक पर्यावरण को फायदा मिले। लोकल सेल्फ-हेल्प ग्रुप और बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट कमेटियों के जुड़ने से ग्रीन स्पेस को बचाने में समुदाय की भागीदारी भी मज़बूत होने की उम्मीद है।
राज्य के बड़े हिस्से में सूखे के बीच यह नई मंजूरी दिखाती है कि सरकार मौजूदा ग्रीन कवर को बनाए रखने और पानी बचाने की कोशिशों को मज़बूत करने, दोनों पर एक साथ ध्यान दे रही है।
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