बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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संजय गांधी उद्यान के ESZ में आठ प्रोजेक्ट मंजूर, 468 पेड़ कटेंगे

संजय गांधी उद्यान के ESZ में आठ प्रोजेक्ट मंजूर, 468 पेड़ कटेंगे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 शहर डेस्क

महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव मंडल ने मुंबई और ठाणे से सटे संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में आठ प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है।

मुंबई और ठाणे से सटे संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) में आठ प्रोजेक्ट को महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव मंडल ने मंजूरी दे दी है। इन प्रोजेक्ट के लिए कुल 468 पेड़ काटे जाएंगे।

इससे पहले कर्जत में बिजली प्रोजेक्ट के लिए 32 हजार से ज्यादा पेड़ काटने के प्रस्ताव का तीखा विरोध हुआ था। उसके बाद सरकार ने वह प्रस्ताव फिलहाल रोक दिया। लेकिन दूसरी तरफ संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में विकास कामों के लिए पेड़ कटाई को हरी झंडी मिल गई है।

सबसे ज्यादा 236 पेड़ ठाणे के माजिवडा में एक निजी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए काटे जाएंगे। इसी प्रोजेक्ट में 476 पेड़ वैसे ही रखे जाएंगे और 372 पेड़ों का पुनर्रोपण किया जाएगा।

कांदिवली में खटाऊ मिल की जगह पर एक निजी पुनर्विकास प्रोजेक्ट है। इसके लिए 228 पेड़ कटेंगे और 92 पेड़ों का पुनर्रोपण होगा। वन्यजीव मंडल ने कहा है कि इस जगह पर पुरानी चालें हैं, इसलिए उनका पुनर्विकास जरूरी है।

बोरिवली के देविपाडा में झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्राधिकरण (SRA) के प्रोजेक्ट के लिए तीन पेड़ काटे जाएंगे। वहीं ठाणे के कावेसर में एक आवासीय प्रोजेक्ट के लिए एक पेड़ की कटाई होगी।

विहार तालाब के पास आईआईएम मुंबई के पुनर्विकास प्रोजेक्ट को भी मंडल ने मंजूरी दी है। राष्ट्रीय उद्यान की हद से सिर्फ 530 मीटर दूर इस संस्थान के नवीनीकरण पर 306 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

निर्माण के दौरान इंसानों या वन्यजीवों की जान को खतरा न हो, इसके लिए काम की जगह पर सुरक्षा बैरिकेड लगाकर इलाका सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में ब्लास्टिंग करने या पहाड़ काटने जैसे काम पर रोक लगाई गई है।

भाईंदर के आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट और ठाणे के कोलशेत के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी मिली है। बताया गया है कि इन दोनों प्रोजेक्ट से पेड़ों की हरियाली पर असर नहीं पड़ेगा।

बोरिवली में पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र की सीमा पर म्हाडा का एक पुनर्विकास प्रोजेक्ट है। उसे भी मंजूरी मिल गई है। मंडल ने साफ किया है कि संबंधित इमारतें 35 साल से ज्यादा पुरानी हैं, इसलिए उनका पुनर्विकास जरूरी है।

हालांकि इन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव मंडल की मंजूरी भी लेनी होगी।

इस फैसले पर पर्यावरणवादी और वनशक्ति संस्था के प्रतिनिधि डी. स्टॅलिन ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, "पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र का कॉन्सेप्ट अब मजाक बन गया है। इस क्षेत्र का मकसद पर्यावरण की रक्षा करना है, लेकिन असल में रियल एस्टेट के विकास को तरजीह दी जा रही है।"

स्टॅलिन ने आरोप लगाया कि मुंबई के हर उस हिस्से में, जहां शहरीकरण नहीं हुआ है, विकास कामों का रास्ता खोला जा रहा है। उनके मुताबिक राष्ट्रीय उद्यान का संरक्षित क्षेत्र बढ़ाने के बजाय उसके चारों तरफ विकास का फंदा कसा जा रहा है।

स्टॅलिन ने यह भी कहा कि मुंबई महानगरपालिका खुद मान चुकी है कि मुआवजे के तौर पर पेड़ लगाने के लिए शहर में पर्याप्त जगह नहीं है। ऐसे में मुंबई का एक भी पेड़ काटने को सही नहीं ठहराया जा सकता।

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