बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों की दवाओं की जांच के लिए आठ पोर्टेबल मशीनें लगाई गईं

महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों की दवाओं की जांच के लिए आठ पोर्टेबल मशीनें लगाई गईं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सेहत PT24 स्वास्थ्य डेस्क

राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों को सप्लाई होने वाली दवाओं की गुणवत्ता परखने के लिए आठ पोर्टेबल ड्रग टेस्टिंग मशीनें लगाई हैं।

महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी अस्पतालों को दी जाने वाली दवाओं की क्वालिटी में किसी गड़बड़ी का पता लगाने के लिए आठ पोर्टेबल ड्रग टेस्टिंग मशीनें शुरू की हैं। ये रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी पर आधारित उपकरण हैं। ये एक से दो मिनट में दवा की जांच कर सकते हैं और उसकी रासायनिक संरचना में कोई गड़बड़ी दिखे तो उसे आगे की लैब जांच के लिए चिह्नित कर देते हैं।

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश अबितकर ने सोमवार, 26 अक्टूबर को इस पहल का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में दवाओं की क्वालिटी पर नजर रखने का काम मजबूत होगा। राज्य सरकार ने इन मशीनों पर कुल 9.6 करोड़ रुपये लगाए हैं, यानी हर मशीन की कीमत 1.2 करोड़ रुपये है।

ये ट्रुस्कैन रमन डिवाइस अमेरिका की कंपनी थर्मो फिशर साइंटिफिक ने बनाए हैं। ये लेजर आधारित रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी से दवाओं की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करते हैं। किसी पदार्थ पर रोशनी डालने पर वह जिस तरह बिखरती है, उसके आधार पर तकनीक एक रासायनिक फिंगरप्रिंट तैयार करती है। इससे मिले डेटा का मिलान करीब 5,000 दवाओं की जानकारी वाले रेफरेंस डेटाबेस से किया जाता है। मशीनें टैबलेट, कैप्सूल, तरल दवाओं और कफ सिरप की जांच कर सकती हैं। इससे अधिकारियों को उन उत्पादों की पहचान में मदद मिलती है जिनकी और जांच जरूरी हो सकती है।

हालांकि ये उपकरण सिर्फ शुरुआती जांच का नतीजा देते हैं। ये पक्के तौर पर नहीं बता सकते कि कोई दवा नकली या घटिया है। किसी भी नियामक कार्रवाई से पहले संदिग्ध सैंपल को लैब टेस्ट से गुजरना होगा। महाराष्ट्र सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने चिह्नित सैंपल राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से मान्यता प्राप्त 12 प्रयोगशालाओं में भेजने की योजना बनाई है। अधिकारियों को सैंपल जमा करने के करीब आठ दिन के भीतर टेस्ट रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

अगर लैब के नतीजों में क्वालिटी की खामी या मिलावट की पुष्टि होती है, तो लागू कानूनों के तहत संबंधित दवा कंपनी पर कार्रवाई होगी। गंभीर उल्लंघन होने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है। पुष्टि वाले मामलों की सूचना खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को दी जाएगी।

मशीनें ठाणे, पुणे, नागपुर, सोलापुर, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, अमरावती और लातूर में तैनात की गई हैं। विभाग ने 16 अधिकारियों को ट्रेनिंग दी है, जिनमें से दो-दो अधिकारी हर मशीन को सौंपे गए हैं। फ्लाइंग स्क्वाड जिला, उप-जिला और ग्रामीण अस्पतालों के साथ दूसरी सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को सप्लाई होने वाली दवाओं का रैंडम निरीक्षण करेंगे। बताया गया है कि जांच के दौरान हेरफेर और गड़बड़ी रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं बनाई गई हैं। उपकरण सप्लाई करने वाली कंपनी मेंटेनेंस और तकनीकी मदद भी देगी।

सटीकता और नियामक निगरानी को लेकर सवाल भी उठे हैं। बताया गया है कि कंपनी के प्रतिनिधियों ने उपकरणों की सटीकता 90 से 98 फीसदी बताई। संयुक्त आयुक्त (ड्रग्स) गणेश रोकड़े ने कहा कि महाराष्ट्र के एफडीए को इस उत्पाद का डेमो नहीं मिला है और विभाग के पास दवा टेस्ट के लिए अपनी प्रयोगशालाएं हैं। कंपनी के प्रतिनिधियों ने यह भी माना कि मशीनों में दर्ज डेटा के साथ संभवतः हेरफेर हो सकता है, जिससे सुरक्षा इंतजामों और स्वतंत्र सत्यापन की अहमियत सामने आती है।

इसी बीच अबितकर ने स्टाफ की कमी दूर करने के लिए नवंबर के अंत तक 3,300 स्वास्थ्य पेशेवरों की भर्ती की योजना भी बताई। पहले चरण में 1,400 डॉक्टर होंगे, जिनमें 600 विशेषज्ञ और 800 एमबीबीएस ग्रेजुएट हैं। उनके नवंबर के पहले हफ्ते में जॉइन करने की उम्मीद है। दूसरे चरण में नवंबर के अंत तक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के तौर पर नियुक्त होने वाले 1,900 बीएएमएस ग्रेजुएट शामिल हैं।

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