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20:31 IST

विदर्भ के सरकारी अस्पतालों में खाली पदों पर हाई कोर्ट की चिंता, सरकार को एक हफ्ते की मोहलत

विदर्भ के सरकारी अस्पतालों में खाली पदों पर हाई कोर्ट की चिंता, सरकार को एक हफ्ते की मोहलत तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने विदर्भ के सरकारी मेडिकल अस्पतालों में वर्ग-4 यानी चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के बड़ी संख्या में खाली पदों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने नर्सों के रिक्त पदों को लेकर भी राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने कहा कि विदर्भ के कुछ अस्पतालों में वर्ग-4 कर्मचारियों के 50 प्रतिशत से भी ज्यादा पद खाली पड़े हैं। दूसरी तरफ हर साल मरीजों की संख्या कई गुना बढ़ रही है।

सुनवाई के दौरान चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय के सह-निदेशक डॉ। राज गजभिये ने एक शपथपत्र दायर किया। इस रिपोर्ट में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति, मरीजों की संख्या और स्ट्रेचर तथा व्हीलचेयर की उपलब्धता का पूरा ब्योरा दिया गया है। रिपोर्ट के आंकड़ों से साफ है कि रोज लाखों मरीजों का बोझ उठाने वाले इन अस्पतालों में सैकड़ों पद खाली होने का असर रोजमर्रा की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।

वर्ग-4 कर्मचारियों के पदों की स्थिति इस तरह बताई गई है। सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (मेडिकल), नागपुर में 828 स्वीकृत पदों में से 634 कार्यरत हैं और 194 पद रिक्त हैं। इंदिरा गांधी सरकारी मेडिकल कॉलेज (मेयो), नागपुर में 321 स्वीकृत पद हैं, 270 कार्यरत हैं और 51 खाली हैं।

वसंतराव नाईक सरकारी मेडिकल कॉलेज, यवतमाल में 379 स्वीकृत पदों के मुकाबले 181 कार्यरत हैं और 198 पद रिक्त हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, अकोला में 242 स्वीकृत पद हैं, 120 कार्यरत हैं और 122 खाली हैं।

सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, नागपुर में 67 स्वीकृत पदों में से 55 कार्यरत हैं और 12 रिक्त हैं। शासकीय दंत कॉलेज एवं अस्पताल, नागपुर में 58 स्वीकृत पद हैं, 44 कार्यरत हैं और 14 खाली हैं। डॉ बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, नागपुर में 11 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 2 कार्यरत हैं और 9 रिक्त हैं। सावनेर के स्वास्थ्य दल में 20 स्वीकृत पद हैं, 12 कार्यरत हैं और 8 खाली हैं।

इस मामले में न्यायमित्र ईशा ठाकरे ने सरकारी मेडिकल अस्पतालों में नर्सों की कमी की ओर अदालत का ध्यान खींचा। उन्होंने बताया कि नर्सों के 1,207 स्वीकृत पदों में से 116 पद रिक्त हैं।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक सप्ताह के भीतर इन रिक्त पदों को भरने के बारे में शपथपत्र पेश करे।

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