ऑडियो क्लिप पर राज ठाकरे का फडणवीस पर वार, बोले- यह लोकतंत्र का खून और बलात्कार है
मनोज जरांगे पाटील की सामने लाई क्लिप को राज ठाकरे ने "फ्रेंडशिप फाईल" कहा और फॉरेन्सिक जांच के नाम पर वक्त काटने का आरोप मुख्यमंत्री फडणवीस पर लगाया।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मनोज जरांगे पाटील ने एक ऑडियो क्लिप सामने लाई है और उसके बाद से महाराष्ट्र की सियासत गरम है। राज्य में इस पर काफी हलचल मची हुई है। अब इस मामले में मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे भी कूद पड़े हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट लिखकर सरकार को घेरा और सीधे मुख्यमंत्री फडणवीस को निशाने पर लिया।
राज ठाकरे ने इस कथित रिकॉर्डिंग को "फ्रेंडशिप फाइल" नाम दिया है। उनका दावा है कि इसमें भाजपा के कुछ पदाधिकारी, सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी और कुछ यूट्यूब प्रभावक आपस में बात कर रहे हैं।
अपनी पोस्ट में राज ठाकरे ने लिखा कि इन दिनों महाराष्ट्र में "फ्रेंडशिप फाइल" नाम की ऑडियो क्लिप वायरल हो रही है और सबने उसे सुना होगा। उनके मुताबिक यह क्लिप भाजपा के कुछ पदाधिकारियों, पार्टी के सोशल मीडिया में अहम भूमिका निभाने वालों, संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी और ऐसे यूट्यूब प्रभावकों की दोस्ती की है, जो खुद को निष्पक्ष राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, पर असल में भाजपा की कीचड़ उछालने वाली फौज का कवच पहनकर घूमते हैं।
राज ठाकरे का कहना है कि इस बातचीत में किसने किसको 500 करोड़ दिए, यहां से लेकर यह तक सुनाई देता है कि मीडिया पर कैसे धाक जमाई जा सकती है। इसमें यह चर्चा भी है कि कोई भावनात्मक मुद्दा सरकार के गले की फांस बन जाए तो लोगों का ध्यान उससे हटाने के लिए नया धार्मिक ध्रुवीकरण वाला मुद्दा कैसे उछाला जाए और उसके लिए क्या किया जाए।
उन्होंने बताया कि यह क्लिप असल में 29 मिनट की है और उसमें से 500 करोड़ का मुद्दा सबसे ज्यादा गूंज रहा है। राज ठाकरे के शब्दों में, इस पर खुलासे आएंगे और आने ही चाहिए। मगर भाजपा सोशल मीडिया और मीडिया पर किस तरह दबाव बना रही है, इस पर भी चर्चा होनी चाहिए।
फॉरेंसिक जांच को लेकर राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री को सीधे सुनाया। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने "मैंने क्लिप की फॉरेंसिक रिपोर्ट मंगवाई है" कहकर वक्त टालने की कोशिश की है। राज ठाकरे के मुताबिक फॉरेंसिक रिपोर्ट ऑडियो या वीडियो की सच्चाई परखने के लिए मंगवाई जाती है, और खून, बलात्कार, आर्थिक घोटाले जैसे गंभीर अपराधों में सबूतों की सच्चाई जांचने के लिए भी। उन्होंने कहा कि इसमें हुई बातचीत सुनकर ही समझ आ जाता है कि यह लोकतंत्र का खून और बलात्कार है।
राज ठाकरे ने तंज कसा कि चलो अच्छा हुआ, मुख्यमंत्री ने मान तो लिया कि जो बोला गया है वह गंभीर है और उसकी जांच होनी चाहिए। उनकी सलाह थी कि सबूतों की सच्चाई जरूर परखें, लेकिन अगर आपको पता नहीं कि इसमें क्या बोला गया है, तो यह भी देखिए कि आपकी पीठ पीछे क्या-क्या चल रहा था।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह क्लिप शायद दो साल पुरानी होगी और सवाल उठाया था कि यह अभी क्यों आई। इस पर राज ठाकरे बोले कि असली सवाल यह भी है कि क्लिप बाहर कैसे आई और उसे लाया किसने। उन्हें इसमें सरकार के भीतर की हमेशा जैसी शह-काटशह की राजनीति दिख रही है।
आखिर में उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट और उसकी तकनीकी बारीकियों में महाराष्ट्र को गोल-गोल मत घुमाइए। महाराष्ट्र को जो समझना था, वह समझ चुका है। मुख्यमंत्री के तौर पर आप कितने निष्पक्ष हैं और आपने क्या कार्रवाई की, यह महाराष्ट्र को दिखाइए। तभी इस फॉरेंसिक का कोई मतलब है, वरना यह आपके फायदे के लिए मोड़ी गई फॉरेंसिक कहलाएगी।
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