कदम के आरोपों पर दरेकर का पलटवार, बोले- भाजपा पर आरोप और महायुति में रहना नहीं चलेगा
मनोज जरांगे पाटील की ऑडियो क्लिप के बाद महायुति में तनातनी बढ़ी है। शिवसेना नेता रामदास कदम की टीका पर भाजपा के प्रवीण दरेकर ने जवाब दिया।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
राज्य की राजनीति अब एक अलग ही मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। महायुति के नेताओं के बीच पहले से ही अलग-अलग वजहों से एक-दूसरे पर टीका-टिप्पणी चल रही थी। अब मनोज जरांगे पाटील की पेश की हुई ऑडियो क्लिप ने इस माहौल को और गरमा दिया है। जरांगे ने जो ऑडियो बम फोड़ा, उसकी गूंज से महायुति में भागदौड़ मच गई है और भाजपा और शिवसेना के शिंदे गुट के बीच अच्छी-खासी खींचतान शुरू हो गई है।
इस क्लिप के बाद शिवसेना नेता रामदास कदम ने भाजपा पर तीखी टीका की थी। अब भाजपा की तरफ से भी पलटवार आया है। भाजपा नेता प्रवीण दरेकर ने कदम को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि भाजपा पर आरोप लगाना और उसी वक्त महायुति में भी बने रहना, यह नहीं चलेगा। इन्हीं शब्दों में दरेकर ने अपनी नाराजगी जाहिर की।
रामदास कदम की टीका का जवाब देते हुए दरेकर ने कहा कि अगर भाजपा पर निचले स्तर के आरोप लगाए जाएंगे, तो पार्टी चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने साफ चेतावनी भी दी कि भाजपा के साथ रहना और गालियां देना, यह हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।
दरेकर ने प्रसाद लाड और काळकुटे की तस्वीरों का जिक्र करते हुए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर सवाल खड़े किए। कौन किसकी सुपारी लेता है, इस बात को लेकर भी उन्होंने कदम पर निशाना साधा।
कथित ऑडियो क्लिप में जिस 500 करोड़ के लेनदेन की बात है, उस पर दरेकर ने कहा कि जांच पूरी होने दी जाए। उन्होंने बताया कि एकनाथ शिंदे का रुख यह है कि उन्होंने न पैसे दिए हैं और न लिए हैं। दरेकर के मुताबिक क्लिप की बातचीत सुनकर फौरन कोई नतीजा निकाल लेना ठीक नहीं है। जांच एजेंसियों की पूछताछ में सच सामने आ जाएगा, ऐसा उन्होंने कहा। साथ ही उन्होंने साफ किया कि जांच से पहले ऐसे बयान देने से बचना चाहिए, जिनसे महायुति में तनाव पैदा हो।
मुख्यमंत्री पद को लेकर भी दरेकर ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे फिर से मुख्यमंत्री बनें, ऐसी उनके कार्यकर्ताओं की इच्छा हो सकती है। लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह सिर्फ इच्छा पर नहीं, बल्कि राजनीतिक आंकड़ों पर भी निर्भर करता है। यानी किसी को लगा, इसलिए कोई मुख्यमंत्री नहीं बन जाता।
दरेकर ने यह अपील भी की कि महायुति के सवाल मीडिया के सामने उछालने के बजाय वरिष्ठ नेता साथ बैठकर सुलझाएं। उनका कहना है कि गठबंधन में तालमेल के लिए व्यवस्था मौजूद है, ऐसे में सार्वजनिक तौर पर आरोप-प्रत्यारोप करना ठीक नहीं।
उन्होंने सवाल भी उठाया कि शिंदे साहब विपक्ष में तो हैं नहीं, फिर उन्हें डरने की क्या जरूरत है। गठबंधन के नेताओं को एक-दूसरे से तालमेल रखकर चलना चाहिए, यह भी उन्होंने कहा।
अब सबकी नजर इस पर है कि रामदास कदम इस जवाब पर क्या कहते हैं और कथित ऑडियो क्लिप की जांच में क्या निकलकर आता है। राजनीतिक गलियारों में इसी का इंतजार हो रहा है।
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