मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:31 IST

मुंबई महापालिका ने शुरू किया 'पार्टिसिपेट मुंबई' मंच, 'समग्र' के साथ करार

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बृहन्मुंबई महापालिका के सभागृह में डिजिटल मंच 'पार्टिसिपेट मुंबई' का लोकार्पण किया और 'समग्र' संस्था के साथ सामंजस्य करार का आदान-प्रदान हुआ।

मुंबई महापालिका ने शुरू किया 'पार्टिसिपेट मुंबई' मंच, 'समग्र' के साथ करार
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने मुंबई के विकास में नागरिकों, उद्योग-व्यवसाय क्षेत्र, स्वयंसेवी संस्थाओं और विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ाने के लिए 'पार्टिसिपेट मुंबई' नाम का नया डिजिटल मंच शुरू किया है। इसका लोकार्पण महापालिका के सभागृह में हुआ। उसी कार्यक्रम में महापालिका की सेवा व्यवस्था सुधारने, प्रशासकीय प्रक्रिया आसान करने और कामकाज की क्षमता बढ़ाने के लिए 'समग्र' संस्था के साथ सामंजस्य करार का आदान-प्रदान भी किया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इसी मौके पर बोल रहे थे।

कार्यक्रम में कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री तथा मुंबई उपनगर जिले के सह-पालकमंत्री मंगल प्रभात लोढा, मुंबई की महापौर रितू तावडे, उपमहापौर संजय घाडी और महापालिका आयुक्त अश्विनी भिडे मौजूद थे। महापालिका के पदाधिकारी, नगरसेवक, अधिकारी, कर्मचारी और उद्योग व स्वयंसेवी क्षेत्र के प्रतिनिधि भी आए थे।

फडणवीस ने कहा कि 'पार्टिसिपेट मुंबई' सिर्फ कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) का पैसा जुटाने का मंच नहीं है। उनके मुताबिक यह इस सवाल का मंच है कि 'आप और हम साथ आकर समाज के आखिरी तबके के लिए क्या कर सकते हैं'। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में महापालिका को साझेदारी चाहिए, उन प्रकल्पों की जानकारी इस मंच पर रखी जाएगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, रोजगार, पर्यावरण, उद्यान, सौंदर्यीकरण और गरीबी निवारण जैसे क्षेत्रों में काम करने के इच्छुक कंपनियां, स्वयंसेवी संस्थाएं या नागरिक अपनी पसंद का प्रकल्प चुन सकेंगे। कोई संस्था किसी खास क्षेत्र में काम करना चाहे तो अपनी योजना भी इस मंच पर रख सकेगी। फडणवीस ने भरोसा जताया कि इससे महापालिका और सामाजिक व कॉर्पोरेट क्षेत्र के बीच की दूरी घटेगी और विकासकामों को रफ्तार मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएसआर में कितना पैसा खर्च हुआ, इससे ज्यादा अहम यह है कि उससे कितना लोककल्याण हुआ और क्या नतीजा निकला। उन्होंने कहा कि सीएसआर के जरिए काम करने वाली संस्थाओं से सरकार को नई तकनीक, आधुनिक प्रबंधन के तरीके, असरदार निगरानी व्यवस्था और लचीली कार्यपद्धति मिलती है। सरकार की पारंपरिक प्रशासकीय प्रक्रियाओं की कुछ सीमाएं होती हैं, इसलिए सरकारी तंत्र और सीएसआर साझेदारों को जोड़ने से ज्यादा असरदार काम हो सकता है, ऐसा उन्होंने बताया।

कुपोषण पर फडणवीस ने कहा कि मुंबई महापालिका ने बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में बड़ा काम किया है, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण में भी ज्यादा असरदार दखल की जरूरत है। उनके मुताबिक शहर के कुछ हिस्सों में कुपोषण, बच्चों की रुकी हुई बढ़त और दुबलेपन जैसी समस्याएं अब भी दिखती हैं। खासकर झोपड़पट्टियों और गरीब बस्तियों के बच्चों तक पोषण पहुंचाने के लिए सीएसआर साझेदारी का अच्छा इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोषण का सीधा रिश्ता बच्चों के दिमाग के विकास, पढ़ाई में प्रदर्शन और रोग प्रतिरोधक क्षमता से है, इसलिए इसका अगली पीढ़ी पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।

'समग्र' के साथ करार को फडणवीस ने महापालिका प्रशासन को ज्यादा तेज, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि आज भी कई सरकारी प्रक्रियाएं पुराने ढंग से चल रही हैं और बरसों पहले बनी प्रक्रियाओं को आज उसी तरह चलाना ठीक नहीं है। नागरिक आज तुरंत सेवा और समस्याओं का हल चाहते हैं, इसलिए गैरजरूरी चरण कम करके 'बिझनेस प्रोसेस रिइंजिनिअरिंग' की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने करीब 1100 सेवाएं ऑनलाइन करने की कोशिश की। विश्लेषण में पाया गया कि इनमें से करीब 200 सेवाओं का नागरिक असल में इस्तेमाल ही नहीं करते। जिन 45 से 47 सेवाओं और योजनाओं का लोग बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं, उनकी वितरण प्रक्रिया सुधारी जाए तो 90 प्रतिशत नागरिकों को ज्यादा तेज और बेहतर सेवा दी जा सकेगी। फडणवीस के मुताबिक इस प्रक्रिया का पुनर्गठन आखिरी चरण में है और जल्द लागू किया जाएगा।

बृहन्मुंबई महापालिका के निर्माण विभाग में निर्माण नक्शों की जांच के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित प्रणाली शुरू की जा चुकी है। फडणवीस ने कहा कि आगे इस प्रक्रिया में इंसानी दखल कम से कम या शून्य करने का लक्ष्य रखा जाए, जिससे मुंबई में कारोबार करना आसान होगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को वक्त के साथ खुद को बदलना चाहिए और 'हम इतने साल से यह प्रक्रिया करते आए हैं, हमें कोई क्या सिखाएगा' वाली सोच बदलनी होगी।

महापौर रितू तावडे ने कहा कि 'पार्टिसिपेट मुंबई' और 'समग्र' के साथ करार मुंबई के प्रशासकीय इतिहास का अहम पड़ाव है। उनके मुताबिक यह मुंबई के विकास में जनभागीदारी को संस्थागत रूप देने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि आगे प्रशासन और जनता दो छोर नहीं रहेंगे, बल्कि 'मुंबईकरों की सामूहिक शक्ति' शहर के विकास की नई पहचान बनेगी। तावडे ने कहा कि सीएसआर सिर्फ पैसे देने का मामला नहीं, 'चेक नहीं, चेंज' लाने का जरिया होना चाहिए, और 'पार्टिसिपेट मुंबई' उद्योगों, संस्थाओं और नागरिकों की इस क्षमता को महापालिका की जरूरतों से जोड़ेगा।

आयुक्त अश्विनी भिडे ने प्रस्तावना में कहा कि दो करोड़ से ज्यादा आबादी वाले शहर को नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और तेज सेवा देने के लिए प्रशासनिक तंत्र में लगातार सुधार जरूरी है। उन्होंने बताया कि निधि, वस्तु के रूप में मदद, विशेषज्ञों के ज्ञान या स्वयंसेवा, इन रूपों में नागरिकों की भागीदारी ली जाएगी। विभागों और वार्डों के कामकाज के मूल्यांकन और तुलनात्मक समीक्षा की व्यवस्था विकसित करने की भी कोशिश है।

उपमहापौर संजय घाडी ने आभार जताया। फडणवीस के हाथों दोनों उपक्रमों की जानकारी पुस्तिका का अनावरण हुआ। मुंबई में बनने वाले दस नए सुविधा केंद्रों के लिए हिंदुस्थान युनिलिव्हर कंपनी की ओर से सीएसआर के तहत 25 करोड़ रुपये का निधि बृहन्मुंबई महापालिका को सौंपा गया।

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