जरंगे की ऑडियो क्लिप पर नरेश म्हस्के ने बीजेपी के तीन नामों का जिक्र किया
शिवसेना शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हस्के ने जरंगे पाटील की कथित ऑडियो क्लिप को पुलिस और सायबर सेल को सौंपने की मांग की और बीजेपी के तीन नेताओं के नाम लिए।
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मनोज जरांगे पाटील ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एक कथित ऑडियो क्लिप सामने रखी, जिसके बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। राज्य में पहले से ही कई मुद्दों पर विवाद चल रहा है, और अब इस क्लिप ने उसमें और आग डाल दी है। सियासी गलियारों में तरह-तरह की बातें हो रही हैं। इसी बीच शिवसेना शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हस्के ने इस पर प्रतिक्रिया दी और एक चौंकाने वाला बयान दिया है।
इस कथित क्लिप में दावा किया जा रहा है कि शिवसेना के एक सांसद के जरिए जरांगे पाटील को 500 करोड़ रुपये दिए गए। इसी पर नरेश म्हस्के ने सख्त रुख अपनाया है। उनका कहना है कि क्लिप में जो लोग हैं, वे बीजेपी से जुड़े हैं। उन्होंने बीजेपी के तीन नेताओं के नाम भी लिए, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा होने की आशंका है। म्हस्के ने मांग की है कि क्लिप की सच्चाई की जांच की जाए।
म्हस्के ने मीडिया से बात करते हुए मनोज जरांगे से अपील की कि वे यह ऑडियो क्लिप पुलिस और सायबर सेल को दें। उनका कहना था कि अगर क्लिप की आवाजों की सच्चाई जांची जाए, तो पता चल सकता है कि इस पूरे मामले के पीछे कौन है।
म्हस्के ने यह भी कहा कि जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि जरांगे और शिवसेना के बीच विवाद खड़ा करने की कोशिश कौन कर रहा है। उन्होंने अपील की कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर बिना सबूत के आरोप न लगाए जाएं।
कथित क्लिप की आवाजों के बारे में म्हस्के ने बीजेपी प्रवक्ता श्वेता शालिनी, निधी कामदार और विधायक अतुल भातखळकर के नाम लिए। उन्होंने यह भी मांग की कि अगर क्लिप असली है और उसमें सहयोगी पार्टी के नेताओं के बारे में आपत्तिजनक बातचीत है, तो वरिष्ठ नेता इसका संज्ञान लें।
जरांगे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो कथित क्लिप सुनाई, उसमें महिलाओं की बातचीत बताई जा रही है। खबर है कि उनमें से एक महिला ने दावा किया कि श्रीकांत शिंदे के जरिए जरांगे तक 500 करोड़ रुपये पहुंचे। बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में जरांगे की भूमिका पर भी बातचीत में चर्चा है।
फिलहाल यह तय नहीं कहा जा सकता कि क्लिप असली है या उसमें छेड़छाड़ हुई है। क्या इसे AI की मदद से बनाया गया है, यह भी जांच से ही साफ हो पाएगा। असली रिकॉर्डिंग, डिजिटल सबूत और संबंधित लोगों का पक्ष जांचने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। अब नजर इस पर है कि आधिकारिक जांच होती है या नहीं और उससे क्या निकलता है।
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