जरांगे का एकनाथ शिंदे से सवाल: क्या आपने भाजपा नेताओं से 500 करोड़ मुझे देने की बात कही थी?
बीड के नारायणगड पर दशहरा रैली में मनोज जरांगे पाटील ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से 500 करोड़ रुपये को लेकर जवाब मांगा और किसानों के लिए 5 मांगें रखीं।
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बीड जिले के नारायणगड पर हुए दशहरा सम्मेलन में मराठा आंदोलक मनोज जरांगे पाटील ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से सीधा सवाल पूछा। जरांगे ने चुनौती दी कि शिंदे जवाब दें कि क्या उन्होंने भाजपा के नेताओं को बताया था कि उन्होंने 500 करोड़ रुपये दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने किसानों के लिए सरकार के सामने 5 बड़ी मांगें भी रखीं।
नारायणगड बीड जिले में है और इसे 'छोटी पंढरी' के नाम से जाना जाता है। यहीं जरांगे पाटील का दशहरा सम्मेलन हुआ। अपने भाषण में उन्होंने मराठा आरक्षण, राज्य की राजनीतिक हलचल और किसानों के सवालों पर बात की। लेकिन एकनाथ शिंदे को लेकर उनके बयान की सबसे ज्यादा चर्चा शुरू हो गई।
जरांगे पाटील ने दावा किया कि उन्हें पता चला है कि दिल्ली में भाजपा के कुछ नेताओं के बीच इस बात की चर्चा चल रही है कि उन्हें 500 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने पूछा कि क्या एकनाथ शिंदे ने भाजपा से 500 करोड़ रुपये लेकर सांसद श्रीकांत शिंदे के जरिए उन तक पहुंचाने की बात भाजपा नेताओं से कही थी।
जरांगे ने सीधे शब्दों में पूछा, "एकनाथ शिंदे साहब, आपने मुझे 500 करोड़ रुपये दिए क्या?" उन्होंने मांग की कि इस पर साफ जवाब दिया जाए। जवाब के लिए उन्होंने आज शाम तक या अगले दिन सुबह तक का वक्त दिया।
जरांगे ने यह भी कहा कि वे इस मामले की गहराई तक जाएंगे और इस चर्चा के पीछे की सच्चाई सामने आए बिना चुप नहीं बैठेंगे। अब राजनीतिक गलियारों की नजर इस पर है कि एकनाथ शिंदे की क्या प्रतिक्रिया आती है। इस आरोप की संबंधित लोगों की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे जरांगे पाटील के आरोप और सवाल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
भाषण में जरांगे ने इस मुद्दे पर और तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, "मैं कल मराठों से 100 रुपये डालने को कहूं, तो मेरे पास 2,500 करोड़ रुपये जमा हो जाएंगे।" साथ ही उन्होंने चेतावनी दी, "आपका और मेरा सामना 3 महीने बाद होगा।" इस बयान से उन्होंने राजनीतिक टकराव का संकेत दिया।
दशहरा सम्मेलन में जरांगे पाटील ने किसानों की बुरी हालत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने चिंता जताई कि राज्य के किसान बड़े संकट से गुजर रहे हैं और अगले 2 महीनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। उनका कहना था कि किसानों को पूरी आर्थिक मदद मिलनी चाहिए, और इसी बात पर उन्होंने सरकार की मदद की नीति पर सवाल उठाए।
किसानों को मिलने वाली 5,000 रुपये की मदद का जिक्र करते हुए जरांगे ने पूछा कि इस रकम से असल में कितना खर्च निकलेगा। उन्होंने कहा कि मदद के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और उसमें सफर व दूसरे खर्च भी होते हैं। इसलिए उनके मुताबिक किसानों को थोड़ी-सी मदद देने के बजाय बड़ा आर्थिक सहारा देने की जरूरत है।
उन्होंने किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों को साथ लाकर इस सवाल पर काम करने की बात रखी। समाज पर संकट आया हो तो सबको किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए, यह अपील भी उन्होंने की।
सरकार से उनकी 5 प्रमुख मांगें ये रहीं: पहली, संकट में फंसे किसानों को हेक्टेयर पीछे 1 लाख रुपये की मदद। दूसरी, किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए। तीसरी, फसल बीमा के सारे पैसे किसानों के खाते में जमा हों। चौथी, किसानों का रुका हुआ अनुदान तुरंत दिया जाए। पांचवीं, जानवरों के लिए हर गांव में चारा छावनी खड़ी की जाए।
सम्मेलन में मराठा आरक्षण का मुद्दा केंद्र में था, लेकिन एकनाथ शिंदे को लेकर दिए बयान से राजनीतिक चर्चा को नया मोड़ मिला। अब सबकी नजर इस पर रहेगी कि शिंदे इन आरोपों पर क्या रुख लेते हैं और राज्य सरकार किसानों की मांगों पर क्या फैसला करती है।