जरांगे के 500 करोड़ वाले दावे पर रामदास कदम बोले, सबूत दो और संपत्ति की जांच हो
बीड के नारायणगड में दशहरा मेला भाषण में मनोज जरांगे पाटील ने एकनाथ शिंदे पर सवाल उठाए, जवाब में रामदास कदम ने गोरेगांव में सबूत मांगे।
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर आरोप और पलटवार का दौर तेज हो गया है। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने बीड जिले के नारायणगड में हुए दशहरा मेले में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर 500 करोड़ रुपये का दावा किया। इसके बाद शिवसेना (शिंदे गट) के नेता और पूर्व मंत्री रामदास कदम ने जरांगे पर तीखी टिप्पणी की और उनकी संपत्ति की जांच की मांग रखी। दशहरा मेलों के बहाने राज्य का सियासी माहौल गरम दिख रहा है।
नारायणगड के दशहरा मेले में बोलते हुए जरांगे पाटील ने एकनाथ शिंदे का नाम लेकर गंभीर सवाल उठाए। उनके दावे के मुताबिक, एकनाथ शिंदे ने उनके नाम पर दिल्ली से 500 करोड़ रुपये लाए। जरांगे ने सवाल किया, "मेरे नाम पर एकनाथ शिंदे ने दिल्ली से 500 करोड़ रुपये लाए। ये पैसे मुझे देने के लिए चाहिए, ऐसा आपने भाजपा को बताया था क्या? क्या आपने मुझे 500 करोड़ रुपये दिए?" इस कथित रकम पर उन्होंने सीधा जवाब मांगा, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई।
500 करोड़ रुपये के इस दावे की अब तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में आधिकारिक सबूत सामने आना अहम होगा।
जरांगे के आरोपों का जवाब रामदास कदम ने मुंबई के गोरेगांव में नेस्को मैदान पर हुए शिवसेना (शिंदे गट) के दशहरा मेले से दिया। एकनाथ शिंदे पर जरांगे के लगाए आरोपों को लेकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और जरांगे की संपत्ति की जांच करने की मांग की।
कदम ने कहा कि अगर एकनाथ शिंदे पर 500 करोड़ रुपये देने का आरोप लगाया जा रहा है, तो उसके सबूत भी पेश किए जाने चाहिए। उन्होंने जरांगे को चुनौती दी कि पैसे किसने दिए और कहां दिए, इसकी जानकारी वे खुद दें। इस मौके पर कदम ने जरांगे पर निजी टिप्पणी भी की। उनके भाषण के आक्रामक शब्दों से इस सियासी विवाद की तीव्रता और बढ़ गई।
रामदास कदम ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से जरांगे की संपत्ति की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जरांगे के पास कहां कितनी संपत्ति है और वह किसके नाम पर है, यह जानकारी सामने आनी चाहिए। कदम ने यह दावा भी किया कि मराठा समाज को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का काम एकनाथ शिंदे ने किया। उन्होंने कहा कि शिंदे के खिलाफ आरोप लगाते समय जरांगे को सबूत देने चाहिए।
कदम ने अभिजीत दिपके के आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों को आंदोलन में शामिल करके उनके भविष्य पर असर नहीं पड़ना चाहिए, और इसी रुख के साथ उन्होंने उस आंदोलन की आलोचना की। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सूखा पीड़ितों की मदद के मुद्दे से ज्यादा अहमियत राजनीतिक टकराव को दी जा रही है।
इस तरह जरांगे पाटील के 500 करोड़ रुपये वाले दावे और रामदास कदम के जवाब से महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है। एक तरफ जरांगे ने सीधे सवाल उठाए हैं, दूसरी तरफ कदम ने सबूत पेश करने की चुनौती देते हुए जांच की मांग की है। अब राजनीतिक हलकों की नजर इस पर है कि इन आरोपों पर एकनाथ शिंदे क्या रुख अपनाते हैं और आगे कौन से सबूत या सफाई सामने आती है।
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