रविकांत तुपकर की मांग: सूखाग्रस्त किसानों को 5 हजार नहीं, हेक्टर पर 1 लाख रुपये मिलें
क्रांतिकारी किसान संगठन के नेता रविकांत तुपकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मांग की है कि महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों को हेक्टर पर 1 लाख रुपये मुआवज़ा दिया जाए। तुपकर का कहना है कि सरकार ने जो 5 हजार रुपये की मदद घोषित की है, वह बहुत कम है और उससे किसानों के सवाल हल नहीं होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह रकम नहीं दी जाती तो सरकार किसानों के मुद्दों पर अपना ठोस रुख साफ करे।
यह मांग देऊळगाव राजा तहसील कार्यालय में तहसीलदार को निवेदन सौंपते समय की गई। तुपकर ने 19 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री को निवेदन भेजकर सूखाग्रस्त किसानों, भूमिहीन खेतमजदूरों और गांव की जनता के सवालों की ओर सरकार का ध्यान खींचा है। इस निवेदन में कुल 15 प्रमुख मांगें रखी गई हैं।
निवेदन में कहा गया है कि सूखे की वजह से फसलों का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। खेती की लागत, कर्ज की किस्तें, ब्याज और घर का खर्च, इन सबके बीच किसान आर्थिक संकट में फंस गया है। निवेदन के मुताबिक ऐसे हालात में 5 हजार रुपये की मदद किसानों के जख्म पर नमक छिड़कने जैसी है। तुपकर ने मांग की है कि हेक्टर पर 1 लाख रुपये की रकम तुरंत किसानों के खाते में जमा की जाए।
कर्जमाफी और फसल बीमा को लेकर भी मांगें रखी गई हैं। निवेदन में कहा गया है कि किसानों का पूरा कर्ज बिना किसी शर्त के माफ किया जाए। जो किसान नियमित कर्ज चुकाते हैं, उन्हें 2 लाख रुपये का प्रोत्साहन अनुदान मिले और नया फसल कर्ज तुरंत दिया जाए। साल 2024 और 2025 का बकाया फसल बीमा पात्र किसानों को दिया जाए, और 2026 का फसल बीमा मंजूर करके बांटा जाए, यह भी निवेदन में कहा गया है।
सूखे की वजह से जिन भूमिहीन खेतमजदूर परिवारों का रोजगार छिन गया, उनके लिए एक लाख रुपये की खास आर्थिक मदद की मांग भी की गई है।
जानवरों के चारे-पानी और खेती की बिजली पर भी तुपकर ने मांगें रखी हैं। सूखाग्रस्त इलाकों में जानवरों के लिए पूरा चारा, चारा छावनियां और पीने के पानी का इंतजाम हो। गांवों में टैंकर से पानी पहुंचाया जाए, खेती के लिए बिना रुकावट बिजली मिले और जले या खराब ट्रांसफॉर्मर तुरंत बदले जाएं।
साहूकारों के दबाव को लेकर निवेदन में कहा गया है कि बैंक, क्रेडिट सोसायटी, माइक्रो फाइनेंस कंपनियां या निजी साहूकार कर्ज वसूली के लिए किसानों और महिला बचत समूहों को धमकाएं, मानसिक तकलीफ दें या सबके सामने बेइज्जत करें, तो उन पर कानूनी कार्रवाई हो। आर्थिक संकट में फंसे कर्जदारों को कर्ज का पुनर्गठन और आसान किस्तों की सुविधा देने की मांग भी की गई है।
तुपकर ने मुख्यमंत्री फडणवीस से कहा है कि सूखाग्रस्त किसानों को सिर्फ कम मदद की घोषणाएं नहीं चाहिए। उन्हें असल नुकसान के हिसाब से ठीक-ठाक आर्थिक मदद चाहिए। किसानों, खेतमजदूरों और गांव की जनता के सवालों पर सरकार तुरंत फैसला लेकर राहत दे, यह उनकी मांग है।
इस आंदोलन में मधुकर शिंगणे, शेख जुल्फेकार, प्रदीप हिवाळे, सहदेव लाड, वसंतराव पाटील, पुरुषोत्तम शिंगणे, देविदास शिंगणे, संजय शिंगणे, बालाजी सोसे, गजानन जायभाये, मामाजी, किसन मामा, राजेंद्र शिंगणे, पिंटू डोके, जिलानी भाई, राजू नागरे, गणपत शेळके और संदीप शिंदे समेत कई किसान मौजूद थे।
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