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किसानों को हेक्टेयर एक लाख की जरूरत, सरकार ने दिए 5 हजार: विधायक रोहित पवार का आरोप

नांदेड़ में विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया कि सरकार सूखा पीड़ित किसानों की बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।

किसानों को हेक्टेयर एक लाख की जरूरत, सरकार ने दिए 5 हजार: विधायक रोहित पवार का आरोप तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नांदेड़ में विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया कि राज्य की सरकार सूखा पीड़ित किसानों के बुनियादी सवालों को नजरअंदाज कर रही है। उनके मुताबिक किसानों को हेक्टेयर पीछे एक लाख रुपये की मदद की जरूरत है, लेकिन सरकार ने सिर्फ पांच हजार रुपये देकर उन्हें टरका दिया। पवार ने कहा कि सरकार चुनावी प्रचार और जोड़-तोड़ की राजनीति में लगी हुई है।

पवार ने बताया कि सोयाबीन, गन्ना और फलों के बागों का भारी नुकसान हुआ है। उनका कहना था कि जो किसान मुश्किल हालात में अपनी फसल बचा पाए, उन्हें अब माल बेचते वक्त व्यापारियों की अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि ग्रामीण इलाकों में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की ओर से हो रही आर्थिक लूट पर भी सरकार ध्यान दे।

पवार ने यह भी कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा रही है, ऐसे में सरकार को किसानों के सवालों को सबसे ऊपर रखना जरूरी है। गोकुल दूध संघ के चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दबाव डालने के बावजूद विधायक सतेज पाटिल का पैनल जीत गया।

इस बीच मनोज जरांगे-पाटील ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर जो आरोप लगाए हैं, उन पर पवार ने ज्यादा कुछ कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने अपील की कि किसानों के सवालों से ध्यान भटकाने की बजाय राजनीतिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता सूखे के मुद्दे पर बातचीत को केंद्रित रखें। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद रवींद्र चव्हाण, पूर्व मंत्री माधवराव किन्हालकर और कुछ अन्य लोग मौजूद थे।

पवार ने आत्महत्या करने वाले किसान क्षीरसागर के परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने क्षीरसागर की बेटियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी लेने की बात कही और परिवार को मदद का भरोसा दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि बेटियों की पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आने दी जाएगी और इसके लिए जो भी मदद चाहिए, की जाएगी।

इसी मौके पर पवार ने प्रशासन का ध्यान किसानों के सवालों की ओर भी खींचा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि किसानों का कर्ज माफ किया जाए और खेती के लिए पर्याप्त और नियमित बिजली सप्लाई दी जाए।

पवार ने 18 अक्टूबर 2026 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि महाराष्ट्र में सरकार किसानों के बुनियादी सवालों को नजरअंदाज कर रही है और हालात 1972 के ऐतिहासिक सूखे से भी बुरे हैं।

सरकारी पक्ष के बारे में बताया गया है कि 358 में से 265 तालुकाओं (74 फीसदी) में सूखा घोषित हुआ है। SDRF के मानदंड के हिसाब से हेक्टेयर पीछे 8,500 रुपये और ज्यादा से ज्यादा 17000 रुपये तक की मदद मिलेगी। कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि 76 तालुकाओं में फसल का नुकसान हुआ है और चारा-पानी की किल्लत की आशंका है। कर्ज का पुनर्गठन, जमीन राजस्व में छूट और बिजली बिल में रियायत घोषित की गई है, और पानी, चारा तथा बिजली सप्लाई सुचारु रखने के आदेश दिए गए हैं।

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