जयंत पाटील बोले, किसानों को दिवाली पर पांच हजार की मदद बहुत कम, सरकार हाथ खोले
राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जयंत पाटील ने सांगली में किसानों की मदद, स्नातक चुनाव, कानून-व्यवस्था और मंत्रियों की गाड़ियों पर सरकार से सवाल किए।
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सांगली: राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जयंत पाटील ने मांग की है कि अतिवृष्टि और खराब हालात से जूझ रहे किसानों को सरकार दिवाली से पहले ज्यादा आर्थिक मदद दे। उनका कहना है कि सरकार की तरफ से दी जा रही पांच हजार रुपये की मदद बहुत कम है। इसी मौके पर उन्होंने स्नातक चुनाव में भाजपा की रणनीति, अरुण लाड की भूमिका और राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी अपनी बात रखी।
पाटील ने कहा कि किसानों को इस वक्त बड़ी आर्थिक मदद की जरूरत है, और ऐसे में पांच हजार रुपये की रकम बहुत थोड़ी पड़ती है। उनके मुताबिक किसानों की दिवाली अच्छी हो, इसके लिए सरकार को मदद की रकम बढ़ाकर राहत देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की मुश्किलें देखते हुए सरकार को दरियादिली दिखानी चाहिए।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव पर बोलते हुए पाटील ने भाजपा पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि भाजपा को जिले के अपने कार्यकर्ताओं पर भरोसा नहीं है, इसीलिए मुख्यमंत्री और भाजपा के दूसरे मंत्री सभाएं और बैठकें ले रहे हैं।
अरुण लाड के बारे में पाटील ने कहा कि उनकी मतदाता पंजीकरण राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने की है। इसलिए लाड भले भाजपा की तरफ चले गए हों, पर यह जरूरी नहीं कि मतदाता भी उनके साथ जाएं। पाटील ने कहा, "अरुण लाड पिछले 40 साल से हमारे साथ हैं। अपने बेटे के लिए वे भाजपा की बैठक या सभा में गए होंगे, तब भी हम उन पर गुस्सा नहीं करेंगे।" उनकी बातों का मतलब यह निकला कि किसी की राजनीतिक भूमिका और मतदाताओं का फैसला दो अलग चीजें हैं।
कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता जताते हुए पाटील ने सरकार की आलोचना की। उनका कहना है कि राज्य में कानून का डर और दबदबा नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का वक्त कानून-व्यवस्था संभालने के बजाय मंत्रियों और उनके इंतजाम की सुरक्षा में जा रहा है। उनके मुताबिक कई पुलिस स्टेशनों में पुलिस मौजूद ही नहीं होती, क्योंकि वह मंत्रियों के इंतजाम में लगी होती है।
पाटील ने यह सवाल भी उठाया कि मुख्यमंत्री को छोड़कर बाकी मंत्रियों को इतने बड़े पैमाने पर पुलिस इंतजाम की क्या जरूरत है। उन्होंने संकेत दिया कि पुलिस का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था के लिए होना चाहिए, और मंत्रियों की सुरक्षा में बड़ी संख्या में तैनाती से आम नागरिकों की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो रहा है।
ईंधन की बढ़ती कीमतों के संदर्भ में पाटील ने मंत्रियों की गाड़ियों के इस्तेमाल पर भी टिप्पणी की। उनके मुताबिक ईंधन महंगा होने के बाद मंत्रियों ने चार दिन गाड़ियों का इस्तेमाल कम किया, लेकिन उसके बाद हालात पहले जैसे हो गए। उनकी आलोचना से यह बात निकली कि कुछ दिन गाड़ियां कम करने से बात नहीं बनेगी, सरकारी खर्च और गाड़ियों के इस्तेमाल पर लगातार एक रुख अपनाना होगा।
किसानों की मदद से लेकर स्नातक चुनाव, कानून-व्यवस्था और मंत्रियों की गाड़ियों तक, पाटील ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। किसानों को ज्यादा आर्थिक मदद देने की मांग के साथ उन्होंने भाजपा की चुनावी रणनीति और पुलिस इंतजाम की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
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