बुलढाणा: देऊळगावराजा में किसानों ने मांगी भीख, सरकार को भेजे 5 हजार रुपये
क्रांतिकारी किसान संगठन ने देउलगांव राजा में भीख मांगो आंदोलन किया। किसान नेता रविकांत तुपकर भी शामिल हुए।
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बुलढाणा जिले के देऊलगावराजा में सोमवार को क्रांतिकारी किसान संगठन के पदाधिकारियों ने अनोखा भीख मांगो आंदोलन किया। उनका कहना था कि हमें भीख नहीं चाहिए, हमें हमारे पसीने की कीमत चाहिए। किसान नेता रविकांत तुपकर खुद इस आंदोलन में शामिल हुए, इसलिए यह आंदोलन काफी चर्चा में रहा।
संगठन का कहना है कि इस वक्त पूरे राज्य में भीषण सूखे के हालात हैं। ऐसे में किसानों को आर्थिक और मानसिक सहारा देने की जगह सरकार ने उनके साथ क्रूर मजाक किया है। संगठन के मुताबिक सरकार ने 5 हजार रुपये की भीख दी है। किसान, खेत मजदूर और आम लोग सूखे और महंगाई की मार झेल रहे हैं, और माई-बाप सरकार ने भरपूर मदद देने के बजाय पांच हजार रुपये देकर उनका मजाक उड़ाया है। इसी वजह से संगठन के पदाधिकारी काफी नाराज हैं और उसका असर देऊलगावराजा शहर में दिखा।
तुपकर ने कहा कि सरकार के पास किसानों को देने के लिए पैसा नहीं है, इसलिए क्रांतिकारी के कार्यकर्ताओं ने शहर में भीख मांगकर निधि जमा की। भीख में जमा हुई रकम तुपकर की अगुवाई में तहसीलदार के जरिए सरकार के पास जमा कराई गई। साथ ही मांगों का निवेदन भी सौंपा गया।
तुपकर ने गुस्से में सवाल किया कि भीषण सूखे के बीच सरकार के पास कुंभमेले के लिए करोड़ों रुपये हैं, करोड़ों रुपये की गाड़ियां खरीदने के लिए पैसे हैं और मंत्रियों के सूखा दौरों के लिए भी पैसे हैं, तो क्या किसानों को देने के लिए ही पैसे नहीं हैं?
उन्होंने मांग की कि मंत्री, विधायक, सांसद, सचिव और जिलाधिकारी की 3 महीने की तनख्वाह रोकी जाए, कुंभमेला रद्द किया जाए, मंत्रियों के दौरों का खर्च बंद हो और अन्नदाता किसान की मदद की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि चारा छावनियों की योजना दिसंबर में बनाने के बजाय चारे का इंतजाम अभी से किया जाए। तुपकर के शब्दों में, छावनी में नहीं, खूंटे पर चारा दिया जाए। उन्होंने हेक्टेयर की कोई सीमा रखे बिना हेक्टेयर पीछे 1 लाख रुपये नुकसान भरपाई देने की आग्रह भरी मांग की।
संगठन ने बिना किसी शर्त और सीमा के हेक्टेयर पीछे 1 लाख रुपये देने की मांग रखते हुए गंभीर चेतावनी भी दी कि ऐसा न हुआ तो किसानों के गुस्से का सामना करने के लिए तैयार रहें।
कार्यक्रम में मधुकर शिंगणे, जुल्फेगार शेठ, सहदेव लाड, प्रदीप हिवाले, बालाजी सोसे, वसंतराव पाटील, पुरुषोत्तम शिंगणे, देविदास शिंगणे, जिलानी भाई, राजू नागरे, गजानन जायभाये, किसान नागरे, पिंटू डोके, संदीप शिंदे, गणपत शेलके, राजेंद्र शिंगणे और अन्य किसान मौजूद थे।
तुपकर ने चेतावनी दी कि गांव-गांव के किसानों को इकट्ठा करके इस सरकार को बलिराजा की ताकत दिखाई जाएगी। उनके मुताबिक इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है और जल्द ही पूरे राज्य में आक्रामक आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
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