शिंदे का ऐलान: महिलाओं को 25,000 सिलाई मशीनें, सूखा पीड़ित किसानों को दिवाली की मदद
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ठाणे के दशहरा मेले में कहा कि किसानों की दिवाली काली नहीं होने देंगे।
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उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ठाणे में हुए दशहरा मेले में कहा कि वे किसानों की दिवाली काली नहीं होने देंगे। उनके मुताबिक दिवाली से पहले सरकार किसानों की मदद के लिए हाथ बढ़ा चुकी थी। शिंदे ने यह भी कहा कि वे किसानों के साथ खड़े रहेंगे।
महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों के लोगों की दिवाली मीठी करने के लिए एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना (शिंदे गट) की तरफ से ठाणे और मुंबई इलाके से दिवाली के राशन यानी मदद के सामान के ट्रक रवाना किए गए हैं। इन ट्रकों पर 'मदद का तोरण यही शिवसेना की नीति' का नारा लिखा गया है।
एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दशहरा मेला गोरेगाव के नेस्को कॉम्प्लेक्स में होना है। इस मौके पर सूखा पीड़ितों को मदद दी जानी है और दिवाली मीठी करने के लिए जरूरी सामान बांटा जाना है। जरूरी सामान से भरे ट्रक सूखा प्रभावित इलाकों की तरफ निकल चुके हैं।
इस साल दशहरा मेले के मुहूर्त पर इन सामान की गाड़ियों को हरी झंडी दिखाई गई। सूखा पीड़ित किसान परिवारों के लिए जरूरी सामान और दिवाली के फराल का सामान होगा। यह सामान किट के रूप में ट्रकों से भेजा गया है।
किसान परिवारों की महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और उनकी रोजी-रोटी चल सके, इसके लिए 25 हजार सिलाई मशीनें बांटी गई हैं।
सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों की बेटियों की शादी के लिए आर्थिक मदद दी गई है, और लड़कियों को साइकिलें भी बांटी गई हैं। इस बार नवरात्रोत्सव कई जगह सादगी से मनाया गया। 'राजदांडिया' और दूसरे कार्यक्रमों से जमा हुआ फंड इन सूखा पीड़ितों की मदद में लगाया गया है। 'किसानों की दिवाली काली नहीं होने देंगे' का संकल्प जताते हुए शिवसेना के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सीधे गांव-गांव जाकर यह राशन पहुंचा रहे हैं।
दशहरे की शुभकामनाएं देते हुए शिंदे ने बताया कि सूखे को देखते हुए सूखा पीड़ित किसानों की मदद के मकसद से काम की चीजें ठाणे से भेजी गई हैं। उपमुख्यमंत्री शिंदे ने सूखा प्रभावित जगहों का दौरा कर किसानों का दर्द भी जाना।
शिंदे ने कहा कि मदद करने के बाद शिवसेना के कार्यकर्ता किसानों के खेत की मेड़ तक जाएंगे और उनके घर पर तोरण बांधेंगे। उन्होंने ठाणे के दशहरा मेले में यह भी कहा कि शिवसेना 80 फीसदी राजनीति और 20 फीसदी समाजसेवा करती है, और यह बालासाहेब ठाकरे की सीख है।