शिंदे गुट के तीन नेताओं ने कहा, एकनाथ शिंदे फिर मुख्यमंत्री बनें
दशहरा मेले से पहले प्रताप सरनाईक, किशोर दराडे और गुलाबराव पाटील ने एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने पर बयान दिए।
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दशहरा मेले को लेकर शिवसेना में हर साल की तरह इस बार भी तैयारी है। शिवसेना ठाकरे गुट का दशहरा मेला परंपरा के मुताबिक शिवाजी पार्क में होगा, जबकि शिवसेना शिंदे गुट का मेला नेस्को सेंटर में होगा। इसी बीच शिंदे गुट की तरफ से एक नई बात सामने आई है। मेले की पृष्ठभूमि में शिंदे गुट के तीन बड़े नेताओं ने एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने को लेकर बयान दिए हैं।
शिंदे गुट के नेता खुलकर कह रहे हैं कि एकनाथ शिंदे को फिर से मुख्यमंत्री बनना चाहिए। विधायक किशोर दराडे के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक और पानीपुरवठा मंत्री गुलाबराव पाटील ने भी इसी मुद्दे पर बात की। इससे राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग चर्चाएं तेज हो गई हैं।
प्रताप सरनाईक ने मीडिया से बात करते हुए शिंदे के मुख्यमंत्री पद को लेकर बयान दिया। सरनाईक ने कहा कि अभी संख्याबल कम होने की वजह से शिंदे उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन आने वाले समय में संख्याबल बढ़ाकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश की जाएगी। उनके इस बयान के बाद शिंदे गुट की आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा शुरू हो गई है।
किशोर दराडे ने भी कहा था कि सबकी इच्छा है कि एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बनें। उनके मुताबिक शिंदे को मुख्यमंत्री बनाना विधायकों के हाथ में है। दूसरी ओर गुलाबराव पाटील ने कहा कि शिंदे मुख्यमंत्री बनें, यह हर विधायक की भावना है। एक ही दिन तीन नेताओं के ऐसे बयान आने से इस मांग के पीछे की राजनीतिक गणित को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।
प्रदीप पूर्णेकर की हत्या के मामले में संजय राऊत ने एकनाथ शिंदे की आलोचना की थी। इसका जवाब देते हुए सरनाईक ने कहा कि शिंदे के आदेश के बाद वे पूर्णेकर परिवार से मिले थे। सरनाईक ने दावा किया कि शिंदे उस समय बाहर थे, और विरोधियों पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
जितेंद्र आव्हाड को बार-बार धमकियां मिलने के मुद्दे पर भी सरनाईक ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इन धमकियों की जांच होनी चाहिए और जरूरत पड़े तो आव्हाड की सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए।
शिंदे गुट के नेताओं के मुख्यमंत्री पद पर इन बयानों से राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अब सबकी नजर इस पर है कि इन बयानों के बाद महायुति में आगे क्या होता है और कौन से राजनीतिक समीकरण बनते हैं।