सूखे से परेशान किसानों के लिए NMC स्टाफ की अक्टूबर की तनख्वाह से कटेगा एक दिन का वेतन
नागपुर महानगरपालिका ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के अक्टूबर के वेतन से एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री सहायता निधि में जमा करने का आदेश दिया है।
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नागपुर: राज्य में सूखे ने किसानों की कमर तोड़ दी है। अब उनकी मदद के लिए नागपुर महानगरपालिका (NMC) ने भी हाथ बढ़ाया है। मनपा के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की अक्टूबर की तनख्वाह में से एक दिन का वेतन काटकर मुख्यमंत्री राहत कोष में भेजा जाएगा। इस बारे में आदेश निकल चुका है।
यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग के एक खास परिपत्र में दिया गया है, जिस पर मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर के दस्तखत हैं। परिपत्र में बताया गया है कि मनपा यह कदम सरकार के अपने परिपत्र के मुताबिक उठा रही है। राज्य सरकार सूखे की चपेट में आए किसानों के लिए बड़े पैमाने पर राहत अभियान चला रही है, और उसी के तहत मनपा के अफसरों और कर्मचारियों से पहले अपनी मर्जी से एक दिन की तनख्वाह देने की अपील की गई थी।
इस बार तरीका बदल गया है। पहले लोगों से योगदान देने को कहा जाता था और जो मिलता, वही जमा होता था। अब किसी से मांगा नहीं जाएगा, रकम सीधे तनख्वाह से कट जाएगी। परिपत्र के अनुसार अक्टूबर 2026 की नियमित तनख्वाह में से एक दिन के वेतन के बराबर पैसा काटा जाएगा। उसके बाद जो रकम बचेगी, वही संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खाते में आएगी।
अगर किसी को इस कटौती पर ऐतराज है, तो उसके पास सिर्फ दो दिन का समय है। उसे सरकार के तय फॉर्मेट में लिखित आपत्ति अपने विभाग प्रमुख के जरिए देनी होगी। जो लोग इस समय के अंदर आपत्ति नहीं देंगे, उनके बारे में मान लिया जाएगा कि उन्हें दान देने से कोई एतराज नहीं है। इसके बाद सरकारी प्रक्रिया के हिसाब से आगे की कार्रवाई होगी।
लेखा और वित्त विभाग को भी साफ हिदायत दी गई है। पूरी मनपा से कटकर जितना पैसा इकट्ठा होगा, वह मुख्यमंत्री राहत कोष के अधिकृत बैंक खाते में जमा कराना होगा। पैसा जमा होते ही उसकी रसीद और दान देने वालों की पूरी सूची तय समय के भीतर सरकार को सौंपनी होगी।
दान देने वालों को इनकम टैक्स में छूट मिल सके, इसके लिए उनका ब्योरा 25 नवंबर 2026 से पहले तैयार रखना जरूरी किया गया है। यानी लेखा विभाग को यह काम इसी तारीख के भीतर निपटाना होगा।
परिपत्र की एक और बात यह है कि आदेश सिर्फ कागज पर न रह जाए। सभी विभाग प्रमुखों, सहायक आयुक्तों और कार्यालय प्रमुखों से कहा गया है कि वे इसे अपने नीचे काम करने वाले हर अधिकारी और कर्मचारी तक पहुंचाएं और यह पक्का करें कि इसका पूरा पालन हो।
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