विदर्भ में सूखे से 43 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद, दिवाली से पहले मदद का इंतजार
नागपुर और अमरावती संभाग में फसल नुकसान के पंचनामे अंतिम चरण में हैं और किसान दिवाली से पहले सरकारी मदद की राह देख रहे हैं।
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विदर्भ में सूखे की मार किसानों पर भारी पड़ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से 'ट्रिगर 1' के तहत जिन तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था, वहां फसल नुकसान के पंचनामे (सर्वेक्षण) युद्धस्तर पर चल रहे थे। अब यह काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। बताया गया है कि गांव-देहात की हालत बेहद दर्दनाक हो गई है।
हाल यह है कि खेती तो दूर, कई गांवों को पीने के पानी के लिए भी तरसना पड़ रहा है। नागपुर और अमरावती संभाग को मिलाकर कुल 43 लाख हेक्टेयर फसल का नुकसान हुआ है। सरकार ने अल नीनो के असर से इस साल बारिश कम रहने का अंदेशा पहले ही जताया था, और वह अब सच साबित हुआ है।
विदर्भ के करीब 32 लाख खातेदार किसान इस आपदा की चपेट में आए हैं। अकेले अमरावती संभाग में 31 लाख 16 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र का पंचनामा पूरा हो चुका है। इस संभाग में यवतमाल और अकोला जिलों की स्थिति सबसे भीषण है, जहां फसलें लगभग पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं।
नागपुर संभाग में 11 लाख 34 हजार हेक्टेयर क्षेत्र है। इसमें से 9 लाख 59 हजार से ज्यादा किसानों के नुकसान का आकलन पूरा हो चुका है। पूरे विदर्भ में पंचनामे का सिर्फ 3 से 4 प्रतिशत काम बाकी है, और इसकी रिपोर्ट जल्द ही सरकार को सौंपी जाएगी।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने घोषणा की थी कि दिवाली से पहले किसानों के खातों में 5,000 रुपये की अग्रिम सहायता राशि जमा की जाएगी। इस पर करीब 6 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
विपक्ष ने इस मदद को 'ऊंट के मुंह में जीरा' बताकर नाकाफी करार दिया है। उसने किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। इस मांग को देखें तो सरकार को राहत कार्यों पर कम से कम 30 से 40 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।
जानकारों का मानना है कि जैसे किसान इस प्राकृतिक आपदा से परेशान हैं, वैसे ही राज्य सरकार की तिजोरी पर भी भारी वित्तीय बोझ पड़ने की पूरी आशंका है।