रायगड का कोई तालुका नई सूखा सूची में नहीं, धान की फसल बिगड़ने पर किसानों में नाराजगी
राज्य सरकार की संशोधित सूखा सूची में रायगढ़ जिले की एक भी तहसील शामिल नहीं है, जिससे धान की फसल के नुकसान का दावा करने वाले किसान नाराज हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त तालुकों की जो संशोधित सूची नए सिरे से जारी की है, उसमें रायगढ़ जिले के एक भी तालुके का नाम नहीं है। इसी वजह से जिले के किसानों में तीव्र नाराजगी जताई जा रही है। बारिश न होने से धान की फसल को बड़ा नुकसान हुआ है, ऐसा किसानों का दावा है। इसके बावजूद जिले को सूखे की रियायतों से बाहर रखे जाने का आरोप लग रहा है। किसानों की भावना है कि महायुति सरकार ने रायगढ़ के किसानों के साथ विश्वासघात किया है।
बताया गया है कि मंत्रिमंडल की बैठक से पहले जारी हुई इस संशोधित सूची में राज्य के 12 जिलों के कुल 40 तालुके शामिल किए गए हैं। सांगली और गोंदिया जिलों के सात-सात तालुके सूची में हैं। सातारा जिले के पांच तालुके हैं। चंद्रपुर, नाशिक, पालघर और रत्नागिरी जिलों के तीन-तीन तालुकों को जगह दी गई है।
खास बात यह है कि रायगढ़ के पड़ोसी रत्नागिरी जिले के लांजा, मंडणगढ़ और खेड तालुके सूखे की इस सूची में आ गए हैं। लेकिन रायगढ़ जिले का कोई भी तालुका इसमें नहीं है। यही बात जिले के किसानों की नाराजगी और बढ़ा रही है।
दिवाली का त्योहार नजदीक है और ऐसे में कई इलाकों में हाथ तक आ चुकी धान की फसल बारिश के अभाव में बर्बाद हो गई है। खरीफ सीजन की पैदावार घट गई है और अगले सीजन को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। इस हालत में किसानों के सामने अपने परिवार का गुजारा चलाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
इससे पहले जारी हुई पहली सूची में रायगढ़ जिले से सिर्फ श्रीवर्धन तालुके को शामिल किया गया था। उसके बाद कर्जत, महाड, पोलादपूर, माणगाव, रोहा, अलिबाग, पेण और पनवेल समेत जिले के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बनने की बात सामने आई। इन तालुकों को भी सूखे की सूची में शामिल करने की मांग जोर पकड़ रही थी।
जिले की धान की खेती को बारिश के लंबे अंतराल का बड़ा झटका लगा है और किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं। उम्मीद जताई जा रही थी कि अगली सूची में रायगढ़ के तालुके जोड़े जाएंगे। मगर नई सूची में भी जिले को जगह नहीं मिली। इसी से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर जाने की प्रतिक्रिया सामने आ रही है, और रायगढ़ के किसान अब सूखे की रियायतें दिए जाने की मांग कर रहे हैं।