सूखे के हालात: प्रतापराव जाधव ने मवेशियों के चारे-पानी का इंतजाम तुरंत करने को कहा
बुलढाणा में केंद्रीय राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने जिला प्रशासन की बैठक लेकर चारे, पीने के पानी और बांधों के गाद निकालने पर निर्देश दिए।
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बुलढाणा जिले में सूखे का साया गहराता दिख रहा है। इसे देखते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने सोमवार को जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि आने वाले दिनों में मवेशियों के लिए चारे और पीने के पानी का ठीक से इंतजाम किया जाए। राज्य सरकार ने बुलढाणा जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया है। आगे सूखे का असर और गहरा होगा और पानी की समस्या खड़ी होगी।
मवेशियों के चारे का सवाल भी खड़ा होने वाला है। ऐसे में प्रशासन क्या योजना बना रहा है, यह जानने के लिए सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय में बैठक रखी गई थी। जाधव इसी बैठक में बोल रहे थे। बैठक में जिलाधिकारी डॉ. प्रवीण देवरे, जिला परिषद के सीईओ डॉ. चव्हाण, जिला परिषद के पानी आपूर्ति विभाग के अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, जिला पशुधन अधिकारी और बिजली वितरण कंपनी के अधिकारी मौजूद थे। जिले की जल परियोजनाओं के अधिकारी भी बैठक में आए थे।
जाधव ने कहा कि गाँव के स्तर पर पानी की योजना बनाई जाए। बांधों का गाद लोगों की भागीदारी से जेसीबी के जरिए किसानों को मुफ्त निकालकर दिया जाए। उन्होंने लोगों की भागीदारी से नदियों को गहरा करने को भी कहा। जलगांव और संग्रामपुर तहसील की ज्यादातर नदियां सातपुड़ा पर्वत श्रृंखला की गोद से बहती हैं। पानी के बहाव के साथ पत्थर भी बहकर आते हैं और जमा होने से ये नदियां संकरी हो गई हैं। जाधव ने इन्हें गहरा और चौड़ा करने के निर्देश दिए।
गाँव के हर व्यक्ति को पानी मिलना चाहिए, इस नजर से गाँव के सार्वजनिक कुओं की साफ-सफाई करने को कहा गया। साथ ही गाँव में ऊंचाई पर पानी की टंकियां लगाकर उनमें सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए पानी उपलब्ध कराने के उपाय करने को कहा गया। जल जीवन योजना के तहत खोदे गए कुओं को तुरंत बिजली कनेक्शन देने के निर्देश भी जाधव ने प्रशासन को दिए।
पानी की किल्लत को लेकर प्रशासन ने जो उपाय किए हैं, उनकी जानकारी केंद्रीय राज्यमंत्री और बुलढाणा जिले के सांसद प्रतापराव जाधव ने ली। उन्होंने कहा कि जिले के बांधों और परियोजनाओं में जो पानी का भंडार और मृत भंडार है, उसका ठीक से मेल बिठाकर पीने का पानी आरक्षित रखा जाए। जो पानी बचेगा, उसे देखते हुए अधिकारी यह भी पता करें कि खरीफ की अरहर को एक पानी दिया जा सकता है या नहीं। बचा हुआ पानी किसानों को दिया जाए, ताकि अरहर की पैदावार में गिरावट न आए।
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