पुणे पदवीधर नतीजा: भाजप के नवनाथ बन ने शिवसेना पर लगाया महायुती को नुकसान पहुंचाने का आरोप
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भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने विधान परिषद चुनाव में महायुति की हार के लिए शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि शिवसेना नेता रवींद्र धंगेकर ने कहा है कि पार्टी युति का धर्म निभा रही है।
विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव के नतीजे आ गए हैं। इनमें महाविकास अघाड़ी और महायुति के बीच जोरदार खींचतान देखने को मिली। महाविकास अघाड़ी ने स्नातक की 3 में से 3 सीटें जीतीं, जबकि मराठवाड़ा में उसने महायुति की सीट अपने नाम कर ली। सत्ताधारी महायुति ने शिक्षकों की दोनों सीटें जीतीं। पुणे की कांग्रेस की पारंपरिक सीट भाजपा ने 18 साल बाद अपने पास खींच ली। पांच में से महायुति को सिर्फ दो सीटें मिलीं, इसलिए कुछ नेताओं ने नाराजगी जताई है और आत्मचिंतन की जरूरत बताई है।
इसी बीच भाजपा ने महायुति को लगे झटके का ठीकरा सहयोगी पार्टी शिवसेना पर फोड़ा है। भाजपा का आरोप है कि शिवसेना की भूमिका से महायुति का गणित बिगड़ गया। भाजपा का कहना है कि पुणे में शिवसेना ने दूसरे को समर्थन दिया और छत्रपति संभाजीनगर में राष्ट्रवादी के खिलाफ प्रचार हुआ, इसलिए उसने शिवसेना के सामने कुछ सवाल खड़े किए हैं। भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने शिवसेना पर निशाना साधा है।
नवनाथ बन ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में पुणे और नागपुर में सहयोगी पार्टी शिवसेना ने उम्मीद के मुताबिक सहयोग नहीं किया। उनके मुताबिक पुणे में ऐन वक्त पर सचिन सानप को समर्थन देकर शिवसेना ने महायुति की एकजुटता को झटका दिया। बन ने कहा कि सानप को मिले वोट स्नातक चुनाव में भाजपा को नहीं मिले। उन्होंने यह भी कहा कि छत्रपति संभाजीनगर में अब्दुल सत्तार ने सीधे राष्ट्रवादी कांग्रेस के खिलाफ प्रचार किया और उसका भी नुकसान हुआ।
बन ने पोस्ट में कहा कि अगर शिवसेना ने महायुति का धर्म निभाकर भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस का साथ दिया होता, तो पांचों सीटों पर महायुति जीतती। उनके शब्दों में, पुणे की एक सीट के लालच में शिवसेना ने सहयोगी पार्टियों को मुश्किल में डाल दिया और तीन सीटों पर जीत का मौका गंवा दिया। बन ने यह भी कहा कि एक सीट के लिए सहयोगियों का नुकसान करने की भूमिका महायुति के हित में नहीं है।
आंकड़ों का ब्योरा देते हुए बन ने कहा कि पुणे में एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना ने ऐन वक्त पर सचिन सानप को समर्थन दिया। सानप को करीब ग्यारह से बारह हजार वोट मिले। बन के मुताबिक अगर ये वोट भारतीय जनता पार्टी को मिले होते, तो पुणे की स्नातक सीट पर भी उनकी जीत होती। उन्होंने कहा कि छत्रपति संभाजीनगर में राष्ट्रवादी कांग्रेस का उम्मीदवार आधिकारिक था, फिर भी अब्दुल सत्तार ने खुलेआम राष्ट्रवादी कांग्रेस के खिलाफ जाकर प्रचार किया। बन का कहना है कि जहां महायुति पांच-शून्य से जीत सकती थी, वहां तीन सीटों पर हार माननी पड़ी।
बन ने कहा कि सिर्फ दो सीटें जीतने के बाद महायुति के तौर पर थोड़े आत्मचिंतन की जरूरत है। उनके मुताबिक अगर पुणे में सचिन सानप को ऐन वक्त पर समर्थन न दिया गया होता, तो शायद पुणे की दोनों सीटें भाजपा जीत जाती। बन ने बताया कि पुणे में सचिन सानप शिवसेना के आधिकारिक उम्मीदवार नहीं थे। शिवसेना ने एबी फॉर्म मंगेश चिवटे को दिया था, जो पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार थे, और चिवटे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। बन के शब्दों में, भाजपा को लगा कि महायुति में तालमेल है, लेकिन ऐन वक्त पर शिवसेना ने सानप को समर्थन दे दिया, जिससे मतदाताओं में कन्फ्यूजन हुआ और पुणे की स्नातक सीट हाथ से गई। बन ने कहा कि दस-बारह हजार वोटों का कोटा भाजपा को ट्रांसफर हो जाता, तो भाजपा स्नातक की सीट पहले ही राउंड में जीत लेती।
इस पर शिवसेना नेता रवींद्र धंगेकर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शिवसेना गठबंधन का धर्म निभा रही है। जहां शिवसेना का गठबंधन था, वहां उसने अपनी जिम्मेदारी से दोस्ती के नाते सहयोगियों की मदद की है और इसमें कहीं कोई मतभेद नहीं है। धंगेकर के मुताबिक लोकतंत्र में चुनाव के नतीजे जनता का जनादेश होते हैं और उसे मानना पड़ता है। उन्होंने कहा कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सरकार के काम पर मतदान होता है, और शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ वोट दिया है तो इसका मतलब है कि शिक्षक नाराज हैं।
धंगेकर ने यह भी कहा कि जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे, तब भाजपा की सत्ता आई थी, और एकनाथ शिंदे को फिर से मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग काफी बोलते हैं, लेकिन शिवसेना के बारे में बोलना कितना सही है। धंगेकर के मुताबिक शिवसेना ने छिपकर नहीं, खुलेआम समर्थन दिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या आप मैत्री में तालमेल ढूंढने में कम पड़ रहे हैं। धंगेकर ने दोहराया कि एकनाथ शिंदे को फिर से नेतृत्व दिया जाना चाहिए।
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