एमएलसी चुनाव: पवार गुट के अंकुश काकडे बोले, अब हम 2029 की राह देख रहे हैं
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विधान परिषद की पांच सीटों की गिनती में महायुति के 3 और महाविकास आघाडी के 2 उम्मीदवार आगे हैं।
विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की 5 सीटों के लिए वोटों की गिनती चल रही है। अब तक के रुझान में महायुति के 3 और महाविकास आघाडी के 2 उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। सभी सीटें जीतने का महायुति का सपना टूटता दिख रहा है, और इसे महायुति के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
दूसरी तरफ शरद पवार गुट की राज्य की राजनीति में वापसी होती दिख रही है। पवार गुट के दोनों उम्मीदवार जीत की दहलीज पर हैं, इसलिए गुट में जश्न का माहौल है। हर्षदा देशमुख और प्रतापसिंह पाटील की जीत लगभग पक्की हो चुकी है। इसी पर शरद पवार गुट के नेता अंकुश काकडे ने एक बयान दिया है, जिसे लेकर अब तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
काकडे ने हर्षदा देशमुख के प्रचार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि देशमुख ने बहुत अनुशासित तरीके से प्रचार किया था और किसी पर टीका-टिप्पणी नहीं की। वे बहुत सकारात्मक ढंग से मतदाताओं से मिली थीं। बड़े-बड़े विज्ञापन लगाकर प्रचार नहीं किया गया, सिर्फ मतदाताओं से बातचीत की गई। काकडे के मुताबिक उसी का फल अब मिल रहा है।
काकडे ने कहा कि पढ़ा-लिखा मतदाता अब जाग गया है। उसे पता है कि सरकारी मशीनरी को किस तरह हाथ में लिया जाता है, और यह बात अब लोगों को समझ आ रही है। उन्होंने कहा, "हमारा रिजल्ट सौ फीसदी रहा है। हमने दो उम्मीदवार उतारे थे और दोनों जीत की दहलीज पर हैं। मतदाताओं का रुख बदल रहा है। अब हम 2029 की राह देख रहे हैं।"
पवार गुट के प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने भी नतीजों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राज्य के सभी मतदाताओं का आभार माना। शिंदे ने बताया कि पुणे और मराठवाड़ा में उनके दोनों उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। उनके मुताबिक आज भी मराठवाड़ा और पुणे की जनता पवार से प्यार करती है। उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे और अच्छे उम्मीदवार देने पर ऐसा ही नतीजा आता है।
शिंदे ने कहा कि यह नतीजा उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित होगा और उन्हें पूरा भरोसा है कि दोनों उम्मीदवार जीतेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद विधान परिषद का यह उनका पहला चुनाव था। उनके कार्यकाल में यह जीत मिली है और आगे पार्टी के लिए यह जीत प्रेरणा देने वाली होगी।
शिंदे के अनुसार महाराष्ट्र में एक अलग तरह का माहौल था। प्रचार के लिए उनके सभी नेता आए थे और सहयोगी दल भी आए थे। उन्होंने कहा कि महायुति के खिलाफ उन्होंने काम किया और यह उसी का नतीजा है।
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