पुणे पदवीधर चुनाव: हर्षदा देशमुख को जीत का भरोसा, सील और पर्चियों पर बोलीं
पुणे पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना के दौरान महाविकास आघाडी की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख जाधव ने जीत का भरोसा जताया।
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पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में महाविकास अघाड़ी की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख जाधव और उनकी प्रतिद्वंद्वी स्मिता जाधव के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। आज बालेवाडी स्टेडियम में मतगणना चल रही थी, उसी दौरान हर्षदा देशमुख जाधव ने जीत का भरोसा जताया।
उनका कहना है कि मतदाताओं ने जिस तरह का रिस्पॉन्स दिया और वोटिंग का प्रतिशत जितना बढ़ा, वह बदलाव का इशारा है। उन्होंने यह भी बताया कि स्नातकों के सवाल उन्होंने समझे हैं और बेरोजगारी तथा पेंशन जैसे अहम मुद्दों पर काम करने पर उनका जोर रहेगा।
उन्होंने कहा कि जीत का भरोसा तो है, क्योंकि कोशिश ईमानदार थी, लेकिन मुकाबला आसान नहीं था। सामने वाला उम्मीदवार भी उतनी ही ताकत का था। उनके मुताबिक कोई भी लड़ाई आसान नहीं होती, पर अपनी तरफ से 100 फीसदी कोशिश करनी होती है और वह उन्होंने की। उनके साथ काम करने वाले सभी लोगों ने, चाहे पदाधिकारी हों या नेता, पूरी कोशिश की। उन्होंने इसे एक बड़ा अनुभव बताया।
जीत के भरोसे की वजह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में वोटिंग का प्रतिशत बढ़ा है। जब-जब प्रतिशत बढ़ता है, तब-तब कायापलट होता है, और इस बार भी उन्हें यकीन है कि कायापलट होगा। उन्होंने पुरानी लड़ाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि महाराज ने सारी लड़ाइयां छापामार तरीके से जीती थीं। मुगलों के सामने उनकी ताकत भी छोटी होती थी। उसी तरह की कोशिश उन्होंने भी की है।
उनके मुताबिक इस चुनाव का केंद्रबिंदु सारे स्नातक थे। उन्हें ईमानदारी से लगता है कि स्नातकों के कई सवाल हैं, खासकर बेरोजगारी के सवाल और शिक्षा व्यवस्था के सवाल। इसी को मुख्य मुद्दा बनाकर वे चुनाव में उतरी हैं।
मतपेटियों की सील को लेकर उन्होंने कहा कि कई मतपेटियों की सील ठीक से नहीं लगाई गई थी। इसलिए आज उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों का काम था कि जहां-जहां ऑब्जेक्शन बनता है, वहां आपत्ति लें, और सभी उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों ने जगह-जगह आपत्ति ली भी है।
पहले राउंड में मतपेटियों से कई पर्चियां पढ़ने को मिलीं। उन्होंने बताया कि एक पर्ची में किसी ने लिखा था कि बेरोजगारी की वजह से स्नातकों की शादी नहीं हो रही है, और यह सवाल भी होने वाले विधायक को उठाना चाहिए। कुछ पर्चियों में लिखा था कि अगर स्नातकों का काम नहीं किया गया तो पाप लगेगा। ऐसी कई तरह की पर्चियां देखने को मिलीं। कुछ में यह भी लिखा था कि सारे चुनाव ईवीएम पर नहीं, बैलेट पर होने चाहिए और कुछ में बेरोजगारी के सवाल थे। उन्होंने इन्हें गंभीर पर्चियां बताया।
उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से हर कोई सारी पर्चियां पढ़ रहा था। अधिकारी पढ़ रहे थे और सामने बैठे सारे एजेंट भी पढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि ये विषय आगे होने वाले विधायक को उठाने चाहिए।
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