पुणे शिक्षक सीट पर कौस्तुभ गावडे की जीत तय, सचिन सानप ने दी बधाई
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पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के कौस्तुभ गावडे की जीत तय है। शिवसेना समर्थित सचिन सानप ने हार मानते हुए गावडे को बधाई दी।
पुणे शिक्षक मतदारसंघ की गिनती अब उस मोड़ पर पहुंच गई है, जहां भाजपा के कौस्तुभ गावडे का जीतना बस ऐलान की बात रह गई है। गिनती में वे सबसे आगे हैं। दूसरे नंबर पर सचिन सानप हैं, जिन्हें एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने समर्थन दिया था। तीसरे नंबर के उम्मीदवार दत्तात्रय सावंत दौड़ से बाहर हो चुके हैं। गावडे और सानप के बीच 6,200 वोट का अंतर है, जबकि सानप के वोटों की गिनती अभी चल रही है।
इससे पहले की गिनती में जीत का कोटा तय किया गया था। इस सीट पर 51 हजार 511 वोट वैध निकले और उनके हिसाब से पहली पसंद के 25 हजार 756 वोट का कोटा बना। जो उम्मीदवार इस आंकड़े को छू लेता, उसे विजयी घोषित किया जाना था। गिनती के दौरान कांग्रेस के जयंत आसगांवकर चौथे दौर में बाहर हुए। उनके वोट बाद में गिने गए, ताकि देखा जा सके कि सानप और सावंत के बीच के फासले में कोई बदलाव आता है या नहीं। उसके बाद अगला उम्मीदवार बाहर होना था और फिर आखिरी नतीजा आना था। दोपहर तक फाइनल रिजल्ट आने की उम्मीद जताई गई थी।
इस चुनाव में कुल 61 हजार 940 मतदाता पंजीकृत थे। वोट 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से दोपहर 4 बजे तक डाले गए और मतदान 85.87 प्रतिशत रहा।
यह सीट शुरू से ही सत्ता पक्ष के भीतर खींचतान की वजह से चर्चा में रही। शिंदे की शिवसेना और भाजपा के बीच इस पर तीखे मतभेद हुए, इसलिए दोनों के बीच एक तरह का दोस्ताना मुकाबला बन गया। शिवसेना ने पहले मंगेश चिवटे को टिकट दिया और उन्होंने पर्चा भी भर दिया था, मगर बाद में नाम वापस ले लिया गया। फिर पार्टी ने निर्दलीय सचिन सानप के पीछे अपनी ताकत लगा दी। कांग्रेस और महाविकास आघाडी की तरफ से जयंत आसगावकर मैदान में थे। माना जा रहा था कि असली टक्कर इन्हीं तीन के बीच है। शिवसेना के लिए यह सीट इज्जत का सवाल बन गई थी, क्योंकि पहले अपना उम्मीदवार उतारना, फिर हटाना और उसके बाद किसी निर्दलीय को समर्थन देना, यह सब पार्टी की साख पर भारी पड़ रहा था। पुणे में भाजपा की पकड़ शिवसेना से ज्यादा मजबूत मानी जाती है। चिवटे पिछले दो-तीन साल से इस चुनाव की तैयारी कर रहे थे, पर आखिरी वक्त पर उन्हें पीछे हटना पड़ा।
पुणे में शिंदे की शिवसेना के नेता रवींद्र धंगेकर भाजपा पर लगातार निशाना साधते आए हैं और नतीजे के दिन भी उन्होंने हमला बोला। धंगेकर ने कहा, "आज दरअसल लोकतंत्र की जीत होगी। विचारों का आदान-प्रदान करने वाले नागरिक हैं, उन्होंने सोच-समझकर ही वोट दिया होगा। करोड़ों रुपये, लाखों रुपये खर्च होने की चर्चा हम सुन रहे हैं। आज का नतीजा शिक्षकों और स्नातकों के पक्ष में जाएगा।"
तस्वीर साफ होते ही सचिन सानप मीडिया के सामने आए और होने वाले विजेता गावडे को बधाई दी। उनका कहना था कि मुकाबला शुरू से सीधे गावडे और उनके बीच था, यह बात वे पहले से कहते रहे हैं और वैसा ही हुआ। इसलिए वोट बंटने जैसा सवाल उनके हिसाब से उठता ही नहीं। उन्होंने बताया कि अंतिम आंकड़े आना बाकी है, लेकिन अपने शिक्षक भाई-बहनों से उन्हें 17 हजार से ज्यादा वोट मिले हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इलाका बहुत बड़ा था, पांच जिले और 58 तहसीलें, और प्रचार के लिए वक्त कम मिला, फिर भी शिक्षकों ने भरोसा जताया।
पैसे बांटने और लेने के आरोपों पर सानप ने साफ कहा कि कोई शिक्षकों को बदनाम करने की कोशिश न करे। उनके मुताबिक यह लड़ाई शिक्षकों के स्वाभिमान और सम्मान की थी और आगे भी वे इसी के लिए जूझते रहेंगे। जिन्होंने दबाव बनाया या लालच दिखाया, उन्हें आज भले कामयाबी दिख रही हो, पर लोगों के मन की बातों को वे बदलाव और आंदोलन के रास्ते पर आगे ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि जनादेश को मानना चाहिए। इसके पीछे क्या कारण रहे और कौन सी ताकतें किस तरह काम कर रही थीं, यह सबको मालूम है, पर उस पर बोलना ठीक नहीं।
सानप ने अपनी मुहिम में साथ देने वालों का नाम लेकर आभार जताया। एकनाथ शिंदे, उदय सामंत, शंभूराज देसाई, प्रकाश आबिटकर, शिवसेना और उसके विधायकों, सांसदों व पदाधिकारियों ने उनके पीछे बड़ी ताकत खड़ी की। किरण सामंत और दादासाहेब भुसे ने भी मदद की कोशिश की। शिंदे और पार्टी ने ऐन वक्त पर जो साथ दिया, उसे उन्होंने आशीर्वाद जैसा बताया और उदय सामंत का खास एहसान माना। तकनीकी बातें कई हो सकती हैं, पर जो कमी रह गई, उसे वे अपनी निजी कमी मानते हैं। उन्होंने कहा कि वे नए थे, पहली बार में अच्छी कोशिश की, थोड़ा कम पड़ गए। शायद कुछ तबकों तक पहुंचने में चूक हुई, जिसे वे सुधारेंगे। उन्हें इस बात का अफसोस रहेगा कि शिक्षकों का विधायक शिक्षक नहीं बन सका, फिर भी उन्हें भरोसा है कि शिक्षकों में जागरूकता आएगी और वे इस लड़ाई से जुड़ेंगे।
इसी दिन पुणे स्नातक मतदारसंघ की गिनती भी चल रही थी। वहां पहली पसंद के वोटों की गिनती खत्म हो गई, पर कोई भी उम्मीदवार 1 लाख 13 हजार 95 वोट का कोटा पार नहीं कर पाया, इसलिए अगली पसंद के वोट गिने गए। उस वक्त तक 21 उम्मीदवार बाहर हो चुके थे। 21वें दौर के बाद महाविकास आघाडी की हर्षदा देशमुख-जाधव (राष्ट्रवादी कांग्रेस, शरद पवार पक्ष) 1 लाख 11 हजार 279 वोट के साथ आगे थीं। भाजपा की डॉ. स्मिता योगेश जाधव 1 लाख 2 हजार 427 वोट पर दूसरे नंबर पर रहीं। हर्षदा की बढ़त 8 हजार 852 वोट की थी और कोटा पूरा करने के लिए उन्हें 1 हजार 816 वोट और चाहिए थे। बताया गया कि शुरुआत में बनी बढ़त अब तक बनी हुई थी।
बाकी उम्मीदवारों में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे पक्ष) के सुनील जबरचंद मोदी 3 हजार 66 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे। सोमनाथ जनार्धन सालुंखे को 2 हजार 638, नामदेवराव जाधव को 1 हजार 955 और लक्ष्मण साहेबराव हरणावल को 1 हजार 472 वोट मिले।
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