विधान परिषद की 5 सीटों में महायुति को 2, उपाध्ये बोले- क्या अब आत्मचिंतन करेंगे?
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पदवीधर और शिक्षक चुनावों में महाविकास आघाडी को तीन और महायुति को दो सीटें मिलीं। नतीजों के बाद केशव उपाध्ये और प्रफुल पटेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।
विधान परिषद के पदवीधर और शिक्षक चुनावों के नतीजे कल घोषित हुए। पांच सीटों में से महाविकास आघाडी के हिस्से में तीन आईं और सत्ताधारी महायुति को दो मिलीं। पदवीधर की तीनों सीटें महाविकास आघाडी ने जीतीं, जिनमें मराठवाड़ा की वह सीट भी है जो महायुति के पास थी। शिक्षकों की दोनों सीटें महायुति के खाते में गईं। पुणे की सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट मानी जाती थी और उसे भाजपा ने 18 साल बाद अपने नाम किया।
सिर्फ दो सीटें मिलने पर कुछ नेताओं ने नाराजगी जताई है और कहा है कि आत्मचिंतन की जरूरत है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने नतीजों के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट करके महायुति से सवाल पूछा। उन्होंने लिखा कि पांच सीटों के नतीजों के बाद क्या हम महायुति के तौर पर आत्मचिंतन करेंगे? उनका कहना है कि अगर सब मिलकर लड़ते तो पांचों सीटें जीतने की आसान संभावना थी, फिर हम दो पर क्यों रुक गए, क्या इस पर सोचेंगे?
राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्याध्यक्ष और सांसद प्रफुल पटेल ने भी अपनी पार्टी को आईना दिखाया। पदवीधर और शिक्षक चुनाव में कम सीटें जीतने और महायुति में दूसरों के लिए छोड़ी गई सीटों को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि आज के विधान परिषद के नतीजे एक साफ और अहम चेतावनी हैं। उनके मुताबिक लोगों का भरोसा फिर से जीतने, पार्टी की प्राथमिकताएं नए सिरे से तय करने और संगठन में सुधार के लिए तुरंत और कड़ा आत्मनिरीक्षण करना पड़ेगा।
पार्टीवार आंकड़े देखें तो भाजपा ने 3 सीटें लड़ीं और 1 जीती। शिंदे गुट ने 2 लड़ीं और 1 जीती। कांग्रेस ने 2 लड़ीं और 1 जीती। राष्ट्रवादी (शरद पवार) ने 2 लड़ीं और दोनों जीतीं। राज्य में कुल 5 सीटों में से महायुति को 2 और विपक्ष को 3 मिलीं।
पुणे पदवीधर सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) की हर्षदा देशमुख-जाधव ने भाजपा की उम्मीदवार स्मिता जाधव को 9,928 वोटों से हराया। लंबी गिनती के बाद 44वें एलिमिनेशन राउंड में उन्होंने जीत के लिए जरूरी कोटा पूरा किया। हर्षदा देशमुख-जाधव को 1 लाख 13 हजार 840 वोट मिले, जबकि स्मिता जाधव को 1 लाख 3 हजार 912 वोट मिले। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाजपा उम्मीदवार के लिए जोरदार प्रचार किया था, फिर भी यह सीट हाथ नहीं आई।
पुणे शिक्षक सीट पर भाजपा के कौस्तुभ गावडे जीते। उन्होंने शिंदेसेना समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को 6 हजार 770 वोटों से हराया। जीत के लिए 25 हजार 756 वोटों का कोटा तय हुआ था। 27 एलिमिनेशन राउंड के बाद गावडे को 23 हजार 177 और सानप को 16 हजार 347 वोट मिले। गावडे इस क्षेत्र से अब तक चुने गए सबसे युवा उम्मीदवार हैं। कांग्रेस के मौजूदा विधायक जयंत आसगावकर चौथे नंबर पर रहे।
औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) पदवीधर सीट पर राष्ट्रवादी (शरद पवार गुट) के डॉ. प्रतापसिंह पाटील जीते। अजित पवार गुट के मौजूदा विधायक सतीश चव्हाण 18 साल से इस क्षेत्र में दबदबा रखते थे। दूसरी पसंद के वोट गिनने के बाद चव्हाण को 60,935 और पाटील को 74,142 वोट मिले, यानी पाटील 13,207 वोटों से आगे रहे।
अमरावती शिक्षक सीट पर महायुति में शामिल शिंदेसेना के किरण सरनाईक जीते। उन्होंने महाविकास आघाडी की प्रा. अदिती पोहरे को हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। सरनाईक पहली पसंद से ही आगे थे, लेकिन जीत के लिए उन्हें 24वें राउंड तक जूझना पड़ा। करीब 32 घंटे चली गिनती में उन्होंने 16,663 वोट लेकर 16,134 का कोटा पार किया।
नागपुर पदवीधर सीट पर गिनती से तस्वीर यह दिखी कि कांग्रेस के मौजूदा विधायक अभिजित वंजारी भाजपा के पूर्व विधायक सुधाकर कोहळे को हराने की ओर हैं। भाजपा ने नागपुर का गढ़ वापस पाने के लिए प्रतिष्ठा दांव पर लगाई थी, मगर बदलते वोटों के गणित, पार्टी के अंदर की नाराजगी और निर्दलीय नितेश कराळे गुरुजी के दूसरी पसंद के वोटों का वंजारी को साथ मिलने से भाजपा की रणनीति फेल होती दिखी।
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