बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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पुणे शिक्षक सीट पर हार के बाद दत्तात्रय सावंत का आरोप, चुनाव में पैसे और दबाव का इस्तेमाल हुआ

पुणे शिक्षक सीट पर हार के बाद दत्तात्रय सावंत का आरोप, चुनाव में पैसे और दबाव का इस्तेमाल हुआ तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

विधान परिषद की पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र सीट के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। इस बार चुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है। कांग्रेस के मौजूदा विधायक जयंत आसगावकर की करारी हार हुई है। दूसरी पसंद के वोटों की गिनती के दौरान वे दौड़ से बाहर हो गए। इस नतीजे के बाद भाजपा समर्थित कौस्तुभ गावडे की जीत का रास्ता साफ हो गया है।

शुरुआती कुछ राउंड के बाद ही दत्तात्रय सावंत तीसरे नंबर पर खिसक गए थे। सावंत रासप के उम्मीदवार हैं। नतीजे के बाद वे मतगणना केंद्र से बाहर निकले तो उन्होंने दावा किया कि चुनाव में पैसों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ।

हार के बाद मीडिया से बात करते हुए सावंत ने कहा कि दूसरे और तीसरे उम्मीदवार वोट के लिए 5000 और 7000 रुपये दे रहे थे। उनके मुताबिक इस निर्वाचन क्षेत्र में इस तरह पैसे देकर वोट लेने की बात खुलेआम हुई। सावंत ने कहा कि उन्हें जो आंकड़े पता चले हैं, उनके हिसाब से कुल 62 हजार मतदाता थे। उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि एक उम्मीदवार की पार्टी ने 52,000 शिक्षकों को पैसे बांटे और एक उम्मीदवार ने 42 हजार शिक्षकों को पैसे दिए।

सावंत का कहना है कि शिक्षकों ने खुद पैसे नहीं लिए, लेकिन लोग उनके घर तक गए और पैसे डालकर आए। उन्होंने कहा कि उन्हें इसका पूरा यकीन है। सावंत ने कहा कि पैसों की बारिश करके यह वोटिंग करवाई गई और वे इसे 100 प्रतिशत सच मानते हैं, क्योंकि राज्य का शिक्षक बहुत बुद्धिजीवी है। उनके मुताबिक आज तक यह मुद्दा कभी नहीं आया था और राजनीतिक पार्टियां इस चुनाव में दखल नहीं देती थीं। इस बार राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव को हायजैक करने की जोरदार कोशिश की और इसके लिए गलत रास्ता चुना, ऐसा सावंत ने कहा।

पैसे बांटने वालों के नाम लेने के सवाल पर सावंत ने कहा कि नाम लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उन पर अच्छे संस्कार हैं और वे शिक्षक हैं, इसलिए नाम नहीं लेते। उनका दावा है कि जो पार्टियां राजनीतिक भूमिका लेकर चुनाव में उतरीं, उन्होंने दूसरे राज्यों से भी अपने जनप्रतिनिधि, यानी विधायक और सांसद, 58 तहसील में लाकर रखे। सावंत के मुताबिक वे 15 दिन तक शिक्षकों के घर जाकर उन पर प्रेशर डालते रहे और उनके हर काम में रुकावट डालते रहे। सावंत ने कहा कि जिन-जिन पार्टियों के लोग थे, उन सबने भारी पैसा फैलाया और वोट लेने की कोशिश की।

सावंत ने यह भी दावा किया कि शिक्षकों पर दबाव डाला गया। उन्होंने कहा कि शिक्षक सीधे गवर्नमेंट सर्वंट नहीं हैं, वे संस्थाओं के सेवक हैं। इसलिए संस्था पर दबाव और स्कूल पर संकट के डर से शिक्षकों पर दबाव डाला गया, ऐसा सावंत का दावा है। उन्होंने कहा कि दबाव संस्थाओं ने नहीं डाला, दबाव संस्थाओं पर डाला गया। इससे संस्थाएं मजबूर हो गईं और उनके सेवकों को आखिर गलत तरीके से जाना पड़ा।

सावंत ने कहा कि उनके पास सीसीटीवी फुटेज नहीं है, लेकिन किसी भी 10 शिक्षकों से बात की जाए तो उनमें से कुछ साफ-साफ बता देंगे। उनके मुताबिक लोग घर तक गए और दरवाजे पर पैसे डालकर चले गए। उन्होंने माना कि दरवाजे पर डाले गए पैसों का क्या हुआ, यह हम खोजने नहीं जाते, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है। सावंत ने कहा कि पिछला इतिहास देखें तो इस तरह वोटिंग होती ही नहीं थी। वे खुद रोज यह सब देखने वाले शिक्षक हैं, इसलिए उनकी साफ राय है कि यह वोटिंग दबाव में हुई और गलत रास्ते से करवाई गई।

सावंत ने कहा कि वे आयोग के पास 100 प्रतिशत शिकायत करेंगे। साथ ही उन्होंने अपनी हार मानी। उनके शब्दों में, हार न मानने के लिए लोकतंत्र नहीं है, और यह चुनाव की प्रक्रिया है, जिसमें वोट आए और उनकी संख्या घोषित हुई। उन्होंने कहा कि वे हार का सामना करने को तैयार हैं। सावंत ने कहा कि उनके सभी शिक्षक साथी आगे अपना मूल काम ईमानदारी से करेंगे और संगठन के तौर पर विद्यार्थियों और शिक्षकों का हित देखना उनका काम है, जो वे करते रहेंगे।

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