टाइगर श्रॉफ फायरिंग: आरोपियों ने कहा, फिल्म इंडस्ट्री में डर फैलाना था मकसद
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टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी के मामले में गिरफ्तार दो शूटरों ने जांचकर्ताओं से कहा कि उनका इरादा सिर्फ डराने का था, मारने का नहीं।
टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग के मामले में गिरफ्तार दो शूटरों, फूल सिंह और रेहान, ने जांचकर्ताओं को बताया है कि उनका मकसद अभिनेता को सिर्फ डराना था, जान से मारना नहीं। सूत्रों के मुताबिक यह बात उन्होंने पूछताछ में कही।
क्राइम ब्रांच की पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर दावा किया कि जब श्रॉफ उनके पास ही फुटबॉल खेल रहे थे, तब उन्हें हमला करने का मौका मिला था। उन्होंने कथित तौर पर जांचकर्ताओं से कहा कि उस वक्त अभिनेता के आसपास कोई सिक्योरिटी नहीं थी। उनका कहना है कि अगर उन्हें मारना होता, तो वे उसी वक्त हमला करके निकल सकते थे।
आरोपियों ने कथित तौर पर यह भी कहा कि उन्हें सिर्फ अभिनेता को डराने और फिल्म इंडस्ट्री में डर का माहौल बनाने के निर्देश मिले थे। क्राइम ब्रांच इन दावों की जांच कर रही है। साथ ही वह हमले के पीछे के मकसद और कई लोगों से जुड़ी कथित साजिश की भी पड़ताल कर रही है।
यह फायरिंग 18 अक्टूबर को जुहू में हुई, जब श्रॉफ एक फुटबॉल क्लब से निकल रहे थे। उनकी कार पर पांच राउंड फायर किए गए। अभिनेता को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन उनका ड्राइवर और एक फैन, उमेश चौहान, घायल हो गए।
अब जांच सिर्फ कथित शूटरों तक सीमित नहीं है। उसमें हमले की कथित प्लानिंग, हथियारों के इंतजाम और उनकी आवाजाही, और कथित तौर पर लॉजिस्टिक मदद देने वालों की भूमिका भी शामिल हो गई है।
मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। अनिल पंडित, जिसे आरोपियों ने कथित मास्टरमाइंड बताया है, अब तक फरार है। पुलिस को शक है कि हमला एक बड़ी आपराधिक साजिश के तहत किया गया।
मामले में सख्त महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) लगाया गया है। इससे पुलिस संगठित आपराधिक गतिविधि के आरोपों की जांच कर सकती है, बशर्ते कानूनी शर्तें पूरी हों।
29 अक्टूबर को मकोका की विशेष अदालत ने सभी 11 आरोपियों को 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। क्राइम ब्रांच ने अदालत को बताया कि आरोपी कथित तौर पर एक टीम की तरह काम करते थे। इसलिए उनसे साथ बैठाकर पूछताछ करनी है, जिसमें जांच में मिले सबूत भी उनके सामने रखे जाएंगे।
जांचकर्ताओं को कुछ आरोपियों के फोन से कथित तौर पर वॉइस नोट और दूसरी डिजिटल सामग्री मिली है। इन रिकॉर्डिंग की जांच हथियारों की कथित खरीद, रखरखाव और डिलीवरी की जानकारी के लिए की जा रही है।
जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि क्या इस हमले का हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी हस्तियों को निशाना बनाने वाले कथित आपराधिक नेटवर्क से कोई संबंध है। एक ऑडियो क्लिप, जिसमें खुद को अनिल पंडित बताने वाले व्यक्ति ने कथित तौर पर हमले की जिम्मेदारी ली, इस व्यापक जांच का हिस्सा है। पुलिस पंडित की कथित भूमिका की जांच कर रही है। दूसरे गैंग सदस्यों या हमलों से किसी भी कनेक्शन की पुष्टि होना अभी बाकी है।
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