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शिवाजी पार्क रैली में उद्धव ठाकरे का फडणवीस को चैलेंज, बिश्नोई को साबरमती से लाएं

उद्धव ठाकरे ने दशहरा रैली में फडणवीस को लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल से महाराष्ट्र लाने की चुनौती दी।

शिवसेना (UBT) चीफ उद्धव ठाकरे ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में पार्टी की सालाना दशहरा रैली में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने फडणवीस को चुनौती दी कि वे गुजरात की साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को पूछताछ के लिए महाराष्ट्र लाकर दिखाएं। ठाकरे ने इसी बहाने राज्य की कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई।

ठाकरे ने मुंबई में बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हाल ही में हुई फायरिंग का जिक्र किया। इसी घटना के हवाले से उन्होंने पुलिस और राज्य सरकार के सुरक्षा इंतजामों के असर पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "अगर आपमें हिम्मत है, तो साबरमती जाएं और लॉरेंस बिश्नोई को यहां लाएं।" बिश्नोई गैंग से जुड़ी क्रिमिनल एक्टिविटी और कथित धमकियों से निपटने के सरकार के तरीके को लेकर उन्होंने फडणवीस पर निशाना साधा।

ठाकरे ने पूछा कि नवरात्रि के त्योहार में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी, फिर भी हथियारबंद हमलावर कैसे काम कर गए। उनका सवाल था कि चेकपॉइंट और सिक्योरिटी तैनात होने के बावजूद आरोपी इलाके में कैसे घुसे और हमला कर गए। उन्होंने पुलिस के असर पर भी सवाल उठाया।

शिवसेना (UBT) चीफ ने गृह विभाग संभालने वाले फडणवीस की भी आलोचना की। उनका आरोप था कि सरकार पब्लिक सेफ्टी की चिंताओं को ठीक से सुलझाए बिना कानून-व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है।

बिश्नोई का जिक्र करते हुए ठाकरे ने कहा कि वह साबरमती जेल में बंद है। उन्होंने सवाल किया कि जब वह कस्टडी में था, तब भी गैंगस्टर का कथित नेटवर्क खतरा कैसे बना रहा। उन्होंने फडणवीस से कहा कि वे यह पक्का करें कि बिश्नोई को फायरिंग केस के सिलसिले में पूछताछ के लिए महाराष्ट्र लाया जा सके। इस मुद्दे के सहारे उन्होंने राज्य और केंद्र सरकारों की अपनी आलोचना और तेज़ की।

यह टिप्पणी ऐसे वक्त आई है जब फिल्म इंडस्ट्री की हस्तियों के खिलाफ बिश्नोई गैंग की कथित धमकियों और हमलों को लेकर नई चिंताएं हैं।

ठाकरे ने अर्बन नक्सलवाद को लेकर भी राज्य सरकार को घेरा। महाराष्ट्र के अर्बन नक्सलवाद का सेंटर बनने के आरोपों पर उन्होंने सवाल उठाया। उनका आरोप था कि अधिकारी ज़रूरी सार्वजनिक मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय प्रदर्शनकारियों और असहमति की आवाज़ों को टारगेट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी नीतियों का विरोध करने वालों पर लेबल लगाने के बजाय नागरिकों की चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए।

शिवाजी पार्क के भाषण में ठाकरे ने लोकतंत्र, वोटिंग अधिकार, किसानों की परेशानी और युवा प्रदर्शनकारियों के साथ बर्ताव के मुद्दे भी उठाए। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमज़ोर करने का आरोप लगाया और सरकार बदलने की मांग की।

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